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कर्नाटक में एक दिन में बिकी 45 करोड़ रुपये की शराब, दुकानों पर दिखीं लंबी कतारें

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कोरोना संकट के बीच सोमवार को शराब के शौकिन लोगों की इंतजार आखिरकार खत्म हुआ और देश के कई शहरों में वाइन शॉप खुलीं. शराब की दुकान खुलने के साथ ही इसके बाहर लंबी-लंबी लाइनें देखने को मिलीं. देश में लागू लॉकडाउन के कारण शराब की दुकानें बंद थीं लेकिन तीसरे चरण के लॉकडाउन को 17 मई तक बढ़ाए जाने के साथ केंद्र सरकार ने काफी छूट दी है. रेड जोन के कन्टेनमेंट और हॉटस्पॉट इलाकों को छोड़कर बाकी सब जगह शराब की दुकानें खोलने की इजाजत दे दी गई है.

आलम ये रहा कि 4 मई को जैसे ही ये छूट लागू हुईं, वैसे ही सुबह से ही शराब की खरीदारी के लिए लंबी-लंबी लाइनें लग गईं. राज्यों ने इस छूट के ऐलान के समय कोई विरोध नहीं जताया. जाहिर सी बात थी कि जैसे ही शराब की दुकानें खुलेंगी तो हंगामा और भीड़भाड़ देखने को मिल सकती है. लेकिन फिर भी किसी राज्य ने इस छूट को देने से मना नहीं किया. इसका कारण राज्यों के राजस्व से जुड़ा है. शराब बिक्री किसी भी राज्य के लिए राजस्व का बहुत महत्त्वपूर्ण और बड़ा जरिया होता है. इसका अनुमान इस बात से लग सकता है कि द क्विंट की एक खबर के मुताबिक, 4 मई को कर्नाटक में 45 करोड़ की शराब बिक्री हुई.

लॉकडाउन की वजह से पूरे देश में आर्थिक गतिविधियों पर रोक लग गई है. इसकी वजह से केंद्र और राज्यों को राजस्व का नुकसान हो रहा है. कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई में सरकारों का अप्रत्याशित खर्चा हो रहा है. ऐसे में शराब की बिक्री को इजाजत मिलना राज्यों के लिए राजस्व के लिहाज से अच्छा कदम है.

सामान्य रूप से राज्य शराब की मैन्युफैक्चरिंग और सेल पर एक्साइज ड्यूटी लगाते हैं. लेकिन तमिलनाडु जैसे राज्य एक्साइज ड्यूटी के अलावा VAT भी चार्ज करते हैं. कई राज्यों में इम्पोर्टेड विदेशी शराब पर स्पेशल फीस, ट्रांसपोर्ट फीस और लेबल-ब्रांड रजिस्ट्रेशन चार्ज भी लगाया जाता है.

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