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गोरेपन या गंजेपन का गलत विज्ञापन पड़ेगा महंगा, सरकार ला रही है 5 साल तक जेल की सजा का प्रस्ताव

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भारत में सुंदरता पाने को लेकर लोगों का जुनून किसी से छुपा नहीं है. सांवले लोग गोरा होने के लिए तरह-तरह के क्रीम का इस्तेमाल करते हैं जबकि गंजेपन से बचने के लिए भी लोग कई तरह के उपाय करते हैं. ये सब इसलिए होता है क्योंकि गोरा बनाने वाली क्रीम और गंजेपन दूर करने वाली कंपनी इसको लेकर तरह-तरह के विज्ञापन देती नजर आती हैं. हालांकि इन कंपनियों को लेकर सरकार सख्त कदम उठाने जा रही है. खबरों के मुताबिक गोरा बनाने वाली क्रीम और गंजेपन दूर करने वाले तेल या एंटी एजिंग क्रीम के विज्ञापन में शामिल लोगों को 5 साल तक की जेल हो सकती है और साथ ही उन्हें 50 लाख रुपये तक का जुर्माना भी भरना पड़ सकता है. इस नए प्रस्ताव को लेकर सरकार ने तैयारी कर ली है.

ड्रग्स एंड मैजिक रेमेडीज (आपत्तिजनक विज्ञापन) विधेयक 2020 के नए मसौदे के लिए पहले अपराध के लिए 10 लाख रुपये तक का जुर्माना और दो साल तक की सजा हो सकती है. वहीं इसके बाद यह गलती दोहराए जाने के बाद जुर्माने की रकम 50 लाख रुपये हो सकती है और सजा बढ़कर पांच साल तक हो सकती है.

मालूम हो कि पहले 1954 के इस अधिनियम के तहत पहली बार दोषी पाए जाने पर छह महीने की सजा का प्रवधान था. हालांकि दूसरी बार दोषी पाए जाने के बाद यह सजा एक साल तक की हो जाती थी. इसमें जुर्माना और जेल दोनों सकता था या नहीं भी हो सकता था. नए संशोधन में किसी भी ऑडियो या विजुअल (लाइट, साउंड, स्मोक, गैस, प्रिंट, इलेक्ट्रोनिक मीडिया, इंटरनेट या वेबसाइट) का विस्तार किया गया है. इसमें कोई नोटिस सर्कुलर, लेबल, रैपर, चालान, बैनर पोस्टर या ऐसे अन्य दस्तावेज शामिल हैं जिन्हें प्रचार के लिए इस्तेमाल किया गया है. संशोधित अधिनियम में उन विज्ञापनों को प्रतिबंधित करने का प्रस्ताव है जो एड्स, अस्थमा, कैंसर, यौन नपुंसकता और शीध्रापतन जैसी 78 तरह की बीमारियों को रोकने और उपचार करने की बात करते हैं.