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हिन्दू-मुस्लिम एकता की अनूठी मिसाल, मुस्लिम दोस्त ने मंदिर बनवाने के लिए इकट्ठा किए 3 लाख रुपया

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सांप्रदायिक रूप से बेहद संवेदनशील माने जाने वाले गुजरात में अक्सर दोस्ती की कहानी सामने आती है. लेकिन दो दोस्तों के बीच का रिश्ता कभी-कभी मिसाल बन जाती है. गुजरात को भले ही सांप्रदायिक रुप से संवेदनशील माना जाता है. लेकिन आज भी गुजरात में आज भी कई गांव ऐसे हैं जहां पर हिन्दू-मुस्लिम एक साथ मिल जुलकर रहते हैं. राज्य सरकार जहां एक तरफ अशांत धारा कानून को अलग-अलग जिलों में लागू कर इन दोनों समुदाय के बीच एक खाई बनाने की कोशिश कर रही है. वहीं इसी गुजरात में एक दोस्त ने दोस्ती के रिश्ते को ऐसे निभाया कि मिसाल बन गई. वह भी ऐसे मौके पर जब आपसी भाईचारा की सख्त जरुरत महसूस की जा रही है.

उत्तर पूर्वी दिल्‍ली में हाल ही में हुई हिंसा में 48 लोगों की मौत हो गई थी. संकट की इस घड़ी में क्‍या हिन्‍दू और क्‍या मुस्लिम सभी ने एक-दूसरे की मदद की. ऐसा होना लाजिमी भी है क्‍योंकि हमारा देश हमेशा से भाई-चारे और एकता के लिए जाना जाता है. ऐसा ही एक मामला गुजरात में सामने आया है, जहां एक मुस्लिम शख्‍स ने मंदिर निर्माण के लिए पैसे जमा कर भारत की विव‍िधता में एकता की संस्‍कृति की मिसाल पेश की है.

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, मूल रूप से तमिलनाडु के परिपट्टी गांव से आने वाले अब्‍दुलखुदा मोहम्‍मद हनीफ शेख अब गुजरात के भरूच जिले के पीरामन गांव में रहते हैं. उन्‍होंने परिपट्टी गांव में मंदिर निर्माण के लिए 3 लाख रुपये इकट्ठा किए हैं.

दरअसल, शेख ने यह कदम तब उठाया जब उनके गांव के एक साथी विजय कुमार ने उनसे मदद मांगी. शेख के मुताबिक, “उन्‍होंने मुझे चार महीने पहले बताया और वो मेरे पास 10 दिन पहले आए. वापी से लेकर मेहसाणा तक यहां तक कि मेरे इस गांव में भी कई मदरसा हैं. मैं उन सभी के पास खुद गया और इस तरह मैंने तीन लाख रुपये एकट्ठा कर लिए.”

वहीं, विजय कुमार का कहना है कि वह अपने दोस्‍त शेख के साथ गुजरात में 10 दिन तक रुके और 3 लाख रुपये इकट्ठा कर लिए. उसके मुताबिक, “मैंने उनसे मदद मांगी थी. मैं यहां गुजरात में 10 दिन तक रुका और उनके साथ लोगों के पास गया और 3 लाख रुपये इकट्ठा कर लिए. हमारे गांव में हिन्‍दू-मुस्लिम जिस तरह से रहते हैं वैसे कोई नहीं रहता. हर कोई दोस्‍त की तरह रहता है.”