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सुप्रीम कोर्ट में मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का हलफनामा, कहा- अल्लाह के घर में महिलाओं के नमाज पर नहीं है पाबंदी

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आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा देकर कहा है कि नमाज के लिए मस्जिद में महिलाओं के प्रवेश पर कोई पाबंदी नहीं है. वह भी दूसरों की तरह मस्जिद में जा सकती हैं और उन्हें भी वही सुविधाएं मिल सकती हैं. बोर्ड ने महिलाओं के प्रवेश को लेकर जारी फतवों पर टिप्पणी करने से इनकार करते हुए कहा है कि इनकी अनदेखी करनी चाहिए.

आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सचिव मोहम्मद फजलुर्रहीम ने वकील एम आर शमशाद के माध्यम से दाखिल अपने हलफनामे में कहा कि धार्मिक पाठों, शिक्षाओं और इस्लाम के अनुयायियों की धार्मिक आस्थाओं पर विचार करते हुए यह बात कही जा रही है कि मस्जिद के भीतर नमाज अदा करने के लिए महिलाओं के मस्जिद में प्रवेश की अनुमति है. इसलिए कोई मुस्लिम महिला नमाज के लिए मस्जिद में प्रवेश के लिए स्वतंत्र है. उसके पास मस्जिद में नमाज के लिए उपलब्ध इस तरह की सुविधाओं का लाभ उठाने के उसके अधिकार का उपयोग करने का विकल्प है

हलफनामे के अनुसार इस्लाम में मुस्लिम महिलाओं के लिए जमात के साथ नमाज पढ़ना अनिवार्य नहीं है और ना ही जमात के साथ जुमे की नमाज में शामिल होना उनके लिए अनिवार्य है जो कि मुस्लिम पुरुषों के लिए अनिवार्य है. इसमें कहा गया कि मुस्लिम महिलाओं को अलग स्थान दिया गया है क्योंकि इस्लाम की शिक्षाओं के अनुसार उन्हें मस्जिद या घर पर जहां चाहें वहां नमाज पढ़ने पर उतना ही धार्मिक सवाब मिलेगा.