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बांद्रा के बाद अब दिल्ली में जमा हुए प्रवासी मजदूर, कहा- दो रात सिर्फ पानी और तीन दिन बाद मिला खाना

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कोरोना वायरस के बीच लॉकडाउन के चलते प्रवासी मजदूरों के सामने बड़ी मुश्किल खड़ी हो गई है. उनके पास ना रोजगार है ना खाने और रहने के लिए मकान. मजदूर देश के अलग-अलग इलाके में दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर हैं. ऐसी ही कुछ तस्वीर दिल्ली के यमुना बैंक में नजर आई है. जहां यमुना नदी के किनारे पुल के नीचे सैंकड़ो मजदूर रहने को मजबूर हैं. यमुना बैंक पुल के नीचे रह रहे इन मजदूरों की स्थिति दयनीय है. इनके पास ना खाने का ठिकाना है और ना पानी का. भरी दोपहरी में तेज गर्म हवाओं के बीच अपने-अपने सामान लिए ये लोग जमीन पर लेटने को मजबूर हैं.

यमुना नदी के पास पिछले कई दिनों से हजारों की संख्या में लोग रह रहे हैं. सरकार दावा कर रही है कि लोगों को शेल्टर होम में रखा जा रहा है, खाने का पूरा इंतजाम है, जरूरत की चीजें मुहैया कराई जा रही हैं, लेकिन यहां की जमीनी हकीकत कुछ और ही है.

खैर यहां की स्थिति बेहद ही चिंताजनक है. सोशल डिस्टेंसिंग की चल रही कवायद पर पानी फिरता दिख रहा है. दिल्ली में कोरोना संक्रमितों का आंकड़ा 1500 के पार पहुंच चुका है, जबकि 30 लोगों की मौत हो चुकी है. मुंबई के बाद दिल्ली में सबसे ज्यादा कोरोना संक्रमित हैं.

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