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कृषि कानून विरोध: किसानों का सातवें दिन भी प्रदर्शन जारी, कानून रद्द करने की मांग

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केंद्र की मोदी सरकार के द्वारा लागू कृषि कानून के खिलाफ किसानों का विरोध प्रदर्शन सातवें दिन भी जारी है. अपनी मांग को लेकर सड़कों पर उतरे किसानों को मनाने के लिए केंद्र सरकार पहल कर रही है.

बावजूद इसके अभी तक बातचीत का कोई ठोस नतीजा नहीं निकला है. जिसकी वजह से किसानों का आंदोलन भी तेज हो गया है. Agricultural law protest

किसान संगठनों का मानना है कि जब तक केंद्र सरकार इस कानून को वापस नहीं लेती किसानों का आंदोलन जारी रहेगा.

बेनतीजा साबित हुई बैठक Agricultural law protest

राजधानी दिल्ली के विज्ञान भवन में किसान संगठन और केंद्र सरकार के मंत्रियों के बीच एक बैठक आयोजित हुई थी. केंद्र सरकार लगातार दावा कर रही है कि किसानों के लिए एमएसपी जारी रहेगा.

लेकिन किसान इसे मानने से इनकार कर रहे हैं. किसानों का कहना है कि सरकार एमएसपी को भी कानून का हिस्सा बनाए. Agricultural law protest

करीब 3 घंटा तक चली इस बैठक में कोई ठोस नतीजा नहीं निकला इसलिए अब किसानों का आंदोलन और तेज हो गया है.

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किसान आंदोलन को कर सकते हैं तेज Agricultural law protest

मिल रही जानकारी के अनुसार किसान अब भी सिंधु बॉर्डर, टिकरी बॉर्डर, गाजीपुर बॉर्डर समेत दिल्ली के अन्य सीमाओं पर डेरा जमाए बैठे हुए हैं.

इतना ही नहीं जानकारी ऐसी भी मिल रही है कि पंजाब और हरियाणा के अन्य किसान भी भारी संख्या में दिल्ली की ओर रवाना हो गए हैं.

यूपी सीमा पर भी किसान पहले से ही अस्थाई घर बनाने की बात कह चुके हैं. किसान राशन और कपड़ों के साथ आए हैं और सरकार से आरपार की लड़ाई लड़ने का मूड बना चुके हैं.

‘मत कीजिए हमारा भला’ Agricultural law protest

खबरों के मुताबिक, किसान संगठन के प्रतिनिधि ने कहा कि आप लोग ऐसा कानून लाए हैं जिससे हमारी जमीने बड़े कॉरपोरेट ले लेंगे, आप कॉरपोरेट को इसमे मत लीजिए.

अब समिति बनाने का समय नहीं है. आप कहते हैं कि आप किसानों का भला करना चाहते हैं, हम कह रहे हैं कि आप हमारा भला मत कीजिए.

बता दें कि किसानों के साथ बैठक में सरकार की ओर से उद्योग राज मंत्री सोमप्रकाश, पीयूष गोयल और कृषि मंत्री मौजूद रहे.

इससे पहले सरकार की ओर से एमएसपी और एपीएमसी एक्ट पर किसान प्रतिनिधियों के सामने प्रजेंटेशन दिया गया. Agricultural law protest

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