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मायावती ने भी किया कृषि बिल का विरोध, कहा- किसानों से ली जानी चाहिए राय

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  • लोकसभा में पास हुआ कृषि बिल
  • कृषि बिल पर शुरू हुआ किसानों का हंगामा
  • मायावती ने कहा किसानों के शंका को दूर किए बिना लाया गया है बिल

लोकसभा में किसानों से जुड़ा कृषि बिल पास होने के बाद जहां एक एक तरफ हंगामा कर रहे हैं. वहीं दूसरी तरफ इस मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजियां भी तेज हो गई है.

कांग्रेस का कहना है कि इस कानून के जरिए पूंजीपति और कंपनियां किसानों का दोहन करेंगी.

वहीं बसपा का मानना है कि इससे कतई भी सहमत नहीं होना चाहिए क्योंकि सरकार ने किसानों की शंकाओं को दूर ही नहीं किया है.

ट्वीट कर मायावती ने बोला हमला

बसपा सुप्रीमो मायावती ने इस बिल को लेकर ट्वीट करते हुए लिखा “संसद में किसानों से जुड़े दो बिल, उनकी सभी शंकाओं को दूर किये बिना ही. कल पास कर दिये गये हैं.

उससे बी.एस.पी. कतई भी सहमत नहीं है. पूरे देश का किसान क्या चाहता है? इस ओर केन्द्र सरकार जरूर ध्यान दे तो यह बेहतर होगा.”

 

किसानों का जारी है हंगामा

कृषि संबंधित बिल लाने के मोदी सरकार विवादों में घिर गई है. जहां एक तरफ केंद्रीय मंत्री और शिरोमणि अकाली दल की सांसद हरसिमरत कौर बादल ने मोदी कैबिनेट से इस्तीफा दे दिया है.

वहीं आज पंजाब में कृषि बिल का विरोध कर रहे किसान ने आत्महत्या करने की कोशिश की उसकी हालत नाजुक बताई जा रही है.

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कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर का दावा

इससे पहले गुरुवार को कृषक उपज व्यापार और वाणिज्य विधेयक, 2020 और कृषक कीमत आश्वासन और कृषि सेवा पर करार विधेयक, 2020 को लोकसभा में पेश किया गया.

कृषि और ग्रामीण विकास मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने विधेयक के फायदे गिनाए और बताया कि ये किसानों के लाभ के लिए हैं.

कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि ये विधेयक खेती को मुनाफे में लाने वाले, किसानों को आजादी दिलाने वाले हैं.

इस विधेयक से किसानों को अपनी उपज किसी भी स्थान से किसी भी व्यक्ति को बेचने का अधिकार होगा.

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इससे निजी निवेश गांव तक पहुंचेगा और रोजगार बढ़ेगा. किसान अच्छी फसलों की तरफ आकृषित होगा. कृषि निर्यात को बढ़ावा मिलेगा.

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