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जुहापुरा भू-माफिया नजीर वोरा के खिलाफ AMC की कड़ी कार्रवाई, दुकानों पर चला बुलडोजर

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  • जुहापुरा भू-माफिया नजीर वोरा के खिलाफ अहमदाबाद नगर निगम की कड़ी कार्रवाई
  • सोनल रोड पर मौजूद अवैध दुकानों पर चला नगर निगम का बुलडोजर
  • कुख्यात भू-माफिया ने करवाया था अवैध तरीके से दुकानों का निर्माण
  • दुकानदारों ने नजीर वोरा ने ली थी भारी डिपोजिट

अहमदाबाद: अहमदाबाद नगर निगम ने मंगलवार को जुहापुरा के एक कुख्यात भू-माफिया नजीर वोरा द्वारा अवैध रूप से निर्माण की गई दुकानों पर बुलडोजर चला दिया है.

नगर निगम के इस कार्रवाई से बिल्डर लॉबी में खलबली मच गई है. कुख्यात भू-माफिया नजीर वोर पर होने वाली इस कार्रवाई के बाद भी कई सवाल उठ रहे हैं.

क्योंकि जिन दुकानों को तोड़ा गया है वहां पर पहली भी नगर निगम बुलडोजर फिरा चुकी है. लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह कि इस कार्रवाई से वोरा को क्या नुकसान पहुंचा?

नजीर वोरा के खिलाफ AMC की कड़ी कार्रवाई

AMC की टीम नज़ीर वोरा की अवैध गतिविधियों पर नकेल कसना शुरू कर दिया है. पिछले दिनों बिजली चोरी के मामले में भी वोरा पर जुर्माना लगाया गया था.

अब पुलिस फोर्स की टीम के साथ नगर निगम की टीम मंगलवार की सुबह मकतमपुरा जुहापुरा स्थित आरक्षण प्लाट पर पहुंची और डिमोलिशन का काम शुरू कर दिया.

भारी पुलिस के साथ एएमसी की टीम ने शुरू की कार्रवाई

भारी पुलिस बंदोबस्त के बीच दक्षिण-पश्चिम जोन के मकतमपुरा में सोनल चार रास्ता के पास विशाल सरखेज रोड पर मौजूद गैर कानूनी तरीके से कब्जा की गई जमीन पर 44 दुकानों पर बुलडोजर फिरा दिया.

लेकिन सवाल यह उठता है कि इससे पहले भी नगर निगम की टीम ने इसी जगह पर मौजूद दुकानों को गिरा दिया था तो फिर नजीर वोरा ने इस जगह पर एक बार फिर से कैसे दुकानों का निर्माण करवा लिया.

क्या नगर निगम के अधिकारी वोरा के इस काले कारोबार में शामिल तो नहीं?

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2 लाख डिपोजिट और 20 हजार किराया!

स्थानीय लोगों के मुताबिक, भू-माफिया नजीर वोरा ने अवैध रूप से दुकानों का निर्माण कर लोगों से एक दुकान के लिए 2 लाख रूपया तक डिपोजिट लिया था.

जबकि 18,000 रुपये से 20,000 रुपये के मासिक किराए दुकानदारों से वसूल कर रहा था.

रोजी-रोटी को लेकर इन दुकानों में व्यवसाय शुरू करने वालों का क्या?

एएमसी की कार्रवाई और भू-माफिया नरीज वोरा की जाल में फंसे वह दुकानदार जिन्होंने रोजी-रोटी को लेकर यहां पर दुकानें शुरू की थी वह अब परेशानियों से दो-चार हो रहे हैं.

क्योंकि दुकान टूटने के बाद नजीर से डिपोजिट का पैसा लेना दुकानदारों के लिए नाक से चना चबाने जैसा है.

ऐसे में सवाल यह उठता है कि एएमसी के इस कार्रवाई से क्या नजीर वोरा को कोई आर्थिक नुकसान हुआ है या नहीं.

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