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गृहमंत्री अमित शाह की आलोचना करने वाले नईम अख्तर पर लगाया गया पीएसए

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श्रीनगर: पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) के वरिष्ठ नेता नईम अख्तर को गृहमंत्री अमित शाह की आलोचना करना महंगा पड़ा. हिंदी वेबसाइट द प्रिंट की खबर के मुताबिक अमित शाह, कश्मीर में लोगों को अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी की आत्मकथा पढ़ने की सलाह देने और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर के एक युवा को पुंछ में अपनी बीमार दादी से मिलने से रोकने के लिए पिछले साल केंद्र सरकार के एक फैसले की निंदा करने के लिए नईम अख्तर के खिलाफ सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम (पीएसए) के तहत मामला दर्ज किया गया है.

अख्तर केंद्र सरकार द्वारा पिछले साल जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को खत्म करने की घोषणा के बाद से हिरासत में रहे हैं. उन पर पिछले हफ्ते पीएसए कानून लगाया गया है. डोजियर में लिखा गया है कि 9 जनवरी 2019 को उन्होंने तत्कालीन भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के पश्चिम बंगाल भाषण का जिक्र किया जिसमें शाह ने हिंदू राष्ट्र के लिए एक खुला आह्वान किया था और भारत के विचार को चुनौती दी थी. उन्होंने आगे कहा कि भाजपा देश में चुनावी लाभ के लिए एक खतरनाक खेल स्थापित कर रही है और चुनाव जीतने के लिए सांप्रदायिक घृणा का कार्ड खेल रही है. इसमें आगे कहा गया है कि पीडीपी के संस्थापक मुफ्ती मोहम्मद सईद के परिवार के करीबी अख्तर, ‘कट्टरपंथी तत्वों’ की ओर हैं. यह भी आरोप लगाया है कि उन्होंने भारत के खिलाफ जनता को उकसाने के लिए राजनीतिक हलकों में अपने रसूख का इस्तेमाल किया.

मालूम हो कि पूर्व कैबिनेट मंत्री अख्तर ने बीजेपी के साथ पार्टी की गठबंधन सरकार के लिए एक प्रवक्ता के रूप में काम किया था, लेकिन बाद में अलग हो गए थे. जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के खिलाफ पीएसए के डोजियर में उनकी पिछली गतिविधियों की तीखी आलोचना की गई है. अख्तर के खिलाफ पीएसए डोजियर 10 साल पहले उमर अब्दुल्ला के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों के बारे में बात करता है, तब अब्दुल्ला राज्य के मुख्यमंत्री थे. ‘डोजियर में लिखा है, तत्कालीन सीएम उमर अब्दुल्ला के खिलाफ 5,000 करोड़ रुपये की पनबिजली परियोजना का आवंटन करने के मामले में नेशनल कॉन्फ्रेंस ने उनके खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर किया.

अख्तर को हिरासत में लेने के अन्य आधारों में उन्हें हुर्रियत कांफ्रेंस के नेता गिलानी की आत्मकथा पढ़ने की सलाह देना शामिल है. डोजियर में लिखा गया है कि कट्टरपंथी तत्वों के प्रति उनका झुकाव 27 सितंबर 2019 के उनके बयान से इकट्ठा किया जा सकता है जिसमें उन्होंने एक शिक्षामंत्री के रूप में लोगों को गिलानी की पुस्तक वूलर किनारे को पढ़ने की सलाह दी थी.