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बिन सचिवालय परीक्षा गड़बड़ी मामला: कांग्रेस-बीजेपी आमने सामने, लगाया जा रहा आरोप-प्रत्यारोप

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अहमदाबाद: बिन सचिवालय परीक्षा में होने वाली गड़बड़ी का मामला सामने आने के बाद गुजरात सरकार ने परीक्षा रद्द करने का ऐलान करते हुए मामले की जांच एस आई टी को दिया था. मामले की जांच करते हुए पुलिस ने कल पांच लोगों को गिरफ्तार किया था जिसमें कुछ लोग गुजरात कांग्रेस से जुड़े थे. कांग्रेस कार्यकर्ता का नाम सामने आने के बाद बीजेपी हमलावर हो गई थी और कांग्रेस पर एक नहीं बल्कि कई आरोप लगाए थे. जिसके बाद कांग्रेस प्रवक्ता मनीष दोशी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन कर बीजेपी पर कई आरोप लगाते हुए पेपर लीक मामले में शामिल गिरफ्तार आरोपी का फोटो सांझा करते हुए कहा कि आरोपी को अभी कुछ दिन पहले बीजेपी के सांसद किरीट सोलंकी ने पार्टी में किया था. इतना ही नहीं बीजेपी से जुड़े कई अन्य नेता जिनका अपराधिक रिकॉर्ड हैं ऐसे लोगों की तस्वीर साझा करते हुए सवाल किया कि क्या इन लोगों के इस हरकत से पूरी पार्टी को जिम्मेदार ठहरा देना चाहिए.

सरकार राजनीतिक रंग दे रही है

कांग्रेस ने आरोप लगाया कि आरोपियों का बीजेपी के साथ कनेक्शन है. कांग्रेस ने आरोपियों की भाजपा सांसद किरीट सोलंकी के साथ तस्वीरें साझा करते हुए कहा कि फारूक कुरैशी को 13 जुलाई 2019 को भाजपा के सदस्यता अभियान में पार्टी में शामिल किया था, घबराई हुई गुजरात की बीजेपी सरकार कांग्रेस को बदनाम करने की कोशिश कर रही है. सांसद किरीट सोलंकी आरोपी को बचाने की कोशिश कर रहे हैं. अरोपी और एम एस स्कूल प्रशासक महमूद फारूक वहाब कुरैशी को परीक्षा के लिए स्कूल आवंटित पद का दुरुपयोग पेपर लीक करवाने का भी आरोप लगाया.

कांग्रेस ने आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार अपनी जिम्मेदारियों को निभाने में लगातार विफल हो रही है, अपनी निष्फलता को छुपाने के लिए इस पूरे मामले को राजनीतिक रंग दे रही है. पेपर लीक मामले की जांच की मांग कांग्रेस ने किया था. गुजरात में सरकारी नौकरियों के लिए स्पर्धात्मक परीक्षा का आयोजन किया जाता है लेकिन पिछले 2 वर्षों में, गुजरात सरकार के द्वारा ली गई स्पर्धात्मक परीक्षा में 90% पेपर लीक हुआ है.

बिन सचिवालय मामले में होने वाली गड़बड़ी का सीसीटीवी फुटेज सामने आने के बाद ये पूरा मामला तूल पकड़ा था, नकल होने का मामला सामने आने के बाद उम्मीदवारों ने गांधीनगर में कई दिनों तक आंदोलन किया था जिसके बाद मामले की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया था. एसआईटी की जांच में नकल का खुलासा होने के बाद गुजरात सरकार ने परीक्षा को रद्द करने का ऐलान किया था.