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CAA विरोधी पाकिस्तान समर्थक- गुजरात उपमुख्यमंत्री

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आरिफ आलम, अहमदाबाद: गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रुपाणी इन दिनों दिल्ली के दौरे पर हैं. ऐसे में गुजरात की जिम्मेदारी उपमुख्यमंत्री नितिन पटेल के कंधे पर है. नितिन पटेल ने भी रुपाणी के नक्शे कदम पर चलते हुए आधे पिच पर जाकर बैटिंग करते हुए इन दिनों नजर आ रहे है. जहां दिल्ली विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने एक बार नहीं बल्कि कई बार पाकिस्तान को मुद्दा बनाकर घुसाने की कोशिश की, वहीं बीजेपी के कई नेता चुनाव का सीधा कनेक्शन पाकिस्तान के साथ भी जोड़ दिया, इतना ही नहीं बीजेपी नेताओं ने मुख्यमंत्री केजरीवाल को आतंकवादी तक बना डाला. बीजेपी के कई नेताओं ने शाहीन बाग में होने वाले नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ प्रदर्शन को भी मुद्दा बनाया और कहा कि जो लोग विरोध कर रहे हैं उनका रिश्ता टुकड़े-टुकड़े गैंग के साथ है. ऐसे में रुपाणी के दिल्ली प्रवास के बाद अब उपमुख्यमंत्री को खुला मैदान मिल गया है, इसीलिए वह रुपाणी की तर्ज पर धुआंधारी पारी खेलने की तैयारी कर रहे हैं और नागरिकता संशोधन कानून का विरोध करने वाले लोगों को पाकिस्तानी समर्थक करार दे रहे हैं.

गुजरात विधानसभा में नागरिकता संशोधन कानून के समर्थन में प्रस्ताव पास होने के बाद गुजरात सरकार इस कानून के समर्थन में माहौल तैयार करने की कोशिश में लगी हुई है. इसी कोशिश के तहत मेहसाणा जिला के कडी में एक विशाल रैली और जनसभा का आयोजन किया गया जिसमें गुजरात के उपमुख्यमंत्री और मेहसाणा विधानसभा सीट के विधायक नितिन पटेल ने एक बार फिर से विवादित बयान देते हुए कहा कि पाकिस्तान से प्यार करने वाले और कांग्रेस के लोग नागरिकता कानून का विरोध कर रहे हैं.

राष्ट्रहित चिंतक समिति के द्वारा सीएए के समर्थन में बुधवार को रैली और सभा का मेहसाणा मार्केटयार्ड में आयोजन किया गया था. सभा को संबोधित करते हुए, सामाजिक नेता श्रद्धा झा ने कानून का विरोध करने वाले लोगों को विदेशी करार दिया. इतना ही नहीं उन्होंने कहा कि आप कौन सी स्वतंत्रता की मांग कर रहे हैं, आपको अपनी जनसंख्या बढ़ाने की स्वतंत्रता तो दी गई है. उन्होंने एक साख धर्म को मानने वाले लोगों को धमकी देते हुए कहा कि अगर भारत में रहना है तो बाप बनकर नहीं बल्कि बेटा बनकर रहना होगा.

नितिन पटेल खुद एक संवैधानिक पद पर बैठे हैं लेकिन उनके द्वारा कई बार देश को अंतरकलह में झोकने वाला बयान सामने आ चुका है. ऐसे में उनके साथ स्टेज पर बैठने वाले लोग भी पीछे नहीं हट रहे, एक खास धर्म को मानने वाले लोगों को धमकी दे रहे हैं. इतना ही नहीं उन्हे विदेशी करार देते हुए कह रहे हैं कि इस देश में रहना है तो नागरिक बनकर नहीं बल्कि दोयम दर्जे का नागरिक बनकर रहना पड़ेगा. अगर कोई भी बाप बनने की कोशिश करेगा तो उसे सबक सिखाया जाएगा. ऐसे में सवाल ये उठता है कि मंत्रीमंडल में शामिल होने से पहले जिस संविधान की शपथ नितिन पटेल ने लिया था, उसका पालन कब करेंगे? नितिन पटेल जैसे नेता खुलेआम जहर उगलने का काम कर रहे हैं. और देश की गंगा जमुनी संस्कृति को नुकशान पहुंचा रहे हैं. इतना ही नहीं इन नेताओं की वजह से ही लोगों के दिलों में नफरत का माहौल भी पैदा किया जाता है. गुजरात ऐसे नफरत भरे भाषण का एक बार नहीं बल्कि कई बार शिकार बन चुका है.

लेकिन कहा जाता है कि सियासत और युद्ध में सब जायज है कुछ ऐसा ही करते हुए नजर आ रहे हैं गुजरात के उपमुख्यमंत्री नितिन पटेल, पाटीदार आरक्षण को लेकर गुजरात में जब आंदोलन चल रहा था उस वक्त उनके मुंह से एक भी शब्द नहीं निकल रहा था. उपमुख्यंत्री रहते हुए उन्ही के इशारे पर पाटीदार आरक्षण की मांग करने वाले आंदोलनकारियों के आवाज को पुलिस ने दबाया था. इतना ही नहीं आंदोलन को खत्म करने के लिए पुलिस ने जमकर आंदोलनकारियों पर दमन भी किया था. जिसमें पूरे गुजरात में 18 से अधिक पाटीदार युवक मारे गए थे. वह मुस्लिम नहीं थे, वह उनके ही समाज के लोग थे. फिर भी राजनीतिक स्वार्थ की इच्छापूर्ती के लिए उनपर भी दमन करवाया गया. ऐसे मामले को देखने के बाद आईने की तरह साफ हो जाता है नेताओं के लिए धर्म या जाति कोई मायने नहीं रखती, बल्कि उनके नजदीक कुर्सी ज्यादा अहमियत वाली होती है. वो सत्ता हासिल करने के लिए किसी भी धर्म या जाति के लोगों पर अत्याचार करने से नहीं हिचकिचाते. और ना ही सांप्रदायिक माहौल को खड़ा करने में क्योंकि इसी की वजह वह अपनी सियासी रोटी सेंकने में कामयाब होते हैं.

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पिछले दिनों गुजरात के उपमुख्यमंत्री नितिन पटेल नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती के मौके पर आयोजित एक कार्यक्रम में मौजूद लोगों को संबोधित करते हुए कहा था कि ‘कुछ लोग आजादी की मांग कर रहे हैं, मैं मोदी से विनती करना चाहूंगा कि देश की सीमाओं को कुछ दिनों के लिए खुला छोड़ दें ताकि जो जहां जाना चहाता हो वो वहां जा सकता है. यहां किसी ने उन्हें पकड़ कर नहीं रखा है. वे हमारे गले पड़े हैं… अरे भाई! जाएं.. आपको पूरी छूट है यहां से जाने की. आप भी छूटे और हम भी छूटे. आजादी और इस प्रकार की बात करने वाले लोगों की मानसिकता को मैं समझ नहीं पाया हूं.’

नितिन पटेल ने कहा कि देश को आजादी 1947 में ही मिल गई थी, लेकिन आप देखते हैं कि कुछ लोग जमा होते हैं और आजादी के नारे लगाते हैं. आपको किससे आजादी चाहिए? क्या आपको अपने माता-पिता से आजादी चाहिए? मैं इसे समझ नहीं पाता हूं. नितिन पटेल का कहना है कि भारत एक आजाद देश है और दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है. लेकिन उन्हे ये नहीं मालूम कि जिस कानून के विरोध में लोग प्रदर्शन कर रहे हैं. उनके मासूम बच्चों की ठंड लगने से मौत हो चुकी है, बावजूद इसके वह आंदोलन से पीछे नहीं हट रहे. इतना ही इस कानून के खिलाफ अब तक पांच राज्यों ने अपने विधानसभा में प्रस्ताव पास कर इसे वापस लेने की मांग कर चुके हैं, और कई राज्य इस कानून के खिलाफ प्रस्ताव लाने का मंसूबा बना रहे हैं. इसलिए लोग देश में सांप्रदायिक माहौल तैयार करने वाली बीजेपी से आजादी की मांग कर रहे हैं.

देश में इन दिनों कई शाहीन बाग बन चुके हैं दिल्ली की तर्ज पर गुजरात के कई हिस्सों में शाहीन बाग बन रहा है. देश में फैले विरोध की इस लहर को खत्म करने के लिए बीजेपी नागरिकता संशोधन कानून के समर्थन में रैली और सभा का आयोजन कर रही है. लेकिन पार्टी से जुड़े नेता इस कानून के समर्थन में कुछ भी नहीं बोलते बल्कि देश का माहौल खराब करने वाले बयान जरुर दे रहे हैं. आप चाहे अमित शाह, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी या फिर विजय रुपाणी, नितिन पटेल के भाषण को सुनते हैं तो आपको एहसास होगा कि उनकी भाषा से देश का नौजवान भटक रहा है, दिल्ली में इसकी झलक भी देखने को मिल चुका है. ऐसे में सवाल ये उठता है कि ये नता अपने संवैधानिक जिम्मेदारियों को कब समझेंगे?

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