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केंद्र सरकार ने अग्निपथ पर शीर्ष अदालत से कहा- कोई भी फैसला लेने से पहले हमारा भी पक्ष सुनें

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नई दिल्ली: अग्निपथ योजना को लेकर देशव्यापी विरोध और सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिकाओं के बीच केंद्र ने भी अदालत का दरवाजा खटखटाया है. सरकार ने एक कैविएट याचिका दायर कर अदालत से अनुरोध किया है कि वह मामले में हमारा पक्ष सुने बिना कोई आदेश जारी न करे.

सशस्त्र बलों में केंद्र की अल्पकालिक भर्ती योजना ‘अग्निपथ’ को चुनौती देते हुए अब तक सुप्रीम कोर्ट में तीन याचिकाएं दायर की गई हैं.

अधिवक्ता हर्ष अजय सिंह ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में एक आवेदन दायर कर केंद्र को “अग्निपथ” भर्ती योजना पर पुनर्विचार करने का निर्देश देने की मांग की, इसके अलावा वकील विशाल तिवारी और मनोहर लाल शर्मा ने भी याचिका दायर की है.

अपनी याचिका में मनोहर लाल शर्मा ने आरोप लगाया कि सरकार ने सशस्त्र बलों के लिए वर्षों पुरानी चयन प्रक्रिया को रद्द कर दिया था, जो असंवैधानिक थी और इसके लिए संसद की अनुमति भी नहीं ली गई. दायर याचिका में शर्मा ने अदालत से देश भर में चल रहे विरोध प्रदर्शन का हवाला देते हुए संबंधित अधिसूचना को असंवैधानिक बताते हुए रद्द करने की कोर्ट से अपील की है.

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