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गुजरात भाजपा के युवा मोर्चे में बदलाव की अटकलें लेकिन संभावनाएं शून्य

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आरिफ आलम, अहमदाबाद: गुजरात बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष के रूप में सीआर पाटिल की नियुक्ति और पाटीदार नेता हार्दिक पटेल को कांग्रेस का कार्यकारी अध्यक्ष चुने जाने के बाद, बीजेपी संगठन में बदलाव की अटकलें शुरू हो गई हैं.

खासकर गुजरात युवा मोर्चा में भी बदलाव की चर्चाएं तेज हो गई हैं. मौजूदा परिस्थिति में चर्चाएं तो खूब हो रही हैं लेकिन संभावनाएं सिर्फ और सिर्फ शून्य नजर आ रही हैं.

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को गांधीनगर सीट जीताने में अहम भूमिका निभाने वाले ऋत्विज पटेल इन दिनों भाजपा युवा मोर्चा के अध्यक्ष हैं. मीडिया और राजनीतिक हल्कों में उनको बदले जाने की चर्चा तेज हो गई है.

राजनीतिक हल्कों में कई मुद्दों पर चर्चा खूब हो रही है. लेकिन ये तमाम के तमाम निराधार हैं.

उल्लेखनीय है कि 2017 में हुए विधानसभा चुनाव के दौरान, जब भाजपा हार्दिक पटेल, जिग्नेश मेवानी और अल्पेश ठाकोर के ट्रिपल फ्रंटियर हमलों से त्रस्त थी, और भाजपा के खिलाफ पाटीदार समुदाय का विद्रोह अपने चरम पर था. भाजपा ने तब इस तिकड़ी को टक्कर देने के लिए ऋत्विज को मैदान में उतारा था. हाल ही में जीतू वाघाणी की जगह उनको भाजपा अध्यक्ष बनाने की प्रबल संभावना थी.

लेकिन उनकी जगह गैर-पाटीदार नेता सीआर पाटिल को नियुक्त कर दिया गया.

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गुजरात युवा भाजपा में केवल एक पटेल नेता

इन दिनों युवा भाजपा में केवल एक ही पटेल नेता हैं और वह हैं ऋत्विज. यदि उन्हें युवा मोर्चे से हटा दिया जाता है, तो स्थानीय चुनाव आ रहे हैं. जिसमें अहमदाबाद सहित 8 म्युनिसिपल कार्पोरेशन का चुनाव शामिल है.

इन परिस्थितियों में अगर ऋत्विज को हटा दिया जाता है. तो सवाल यह उठता है कि उनकी जगह पटेल नेता कौन होगा? जो कांग्रेस के तुरुपकार्ड यानी हार्दिक पटेल का सामना कर सके.

पहले से ही भाजपा प्रमुख पद पर दक्षिण गुजरात के गैर-पटेल नेता सीआर पाटिल को भाजपा अध्यक्ष नियुक्त किया जा चुका है.

इसके अलावा मुख्यमंत्री विजय रूपाणी सौराष्ट्र से हैं. वे भी पाटीदार नहीं हैं. हां उत्तर गुजरात के पटेल नेता नितिन भाई बड़े पद पर हैं. वह पटेल जरूर हैं लेकिन युवा नेता नहीं.

इसलिए अगर ऋत्विक पटेल को युवा मोर्चा के पद से हटा दिया जाता है, तो उनका स्थान खाली ही रहेगा.

बदलाव के लिए तीन संभावनाओं पर एक नज़र

1. कोई बदलाव नहीं: कांग्रेस ने पटेल नेता हार्दिक को नई जिम्मेदारी देने के बाद ऋत्विक पटेल को भाजपा के युवा मोर्चे से हटाने की संभावना नहीं दिखती है. उन्हें निगम और स्थानीय चुनावों तक उनकी जगह पर बनाए रखने की संभावना है.

क्योंकि अगर चुनावों से पहले युवा मोर्चे में बदलाव होता है तो ऋत्विज पटेल को पदोन्नति करनी होगी और उनकी जगह पर भाजपा को चुनाव में हार्दिक के खिलाफ एक नया और पटेल चेहरा ढूंढना होगा. जिसकी संभावनाए नहीं के बराबर दिख रही है.

2. ऋत्विज को मुख्य संगठन में ले जाया जा सकता है: एक और संभावना है कि ऋत्विज पटेल को पदोन्नति देकर उन्हें मुख्य संगठन में ले जाया जाए. लेकिन सवाल यह उठता है कि अगर उन्हें मुख्य संगठन में ले जाया जाता है, तो बीजेपी में ऐसी कौन सी जगह या जिम्मेदारी है जो ऋत्विज को सौंपी जा सकती है.

अगर अध्यक्ष सीआर पाटिल की छत्रछाया में उन्हें काम करना पड़ा तो उनकी पहचान दब जाएगी. ऐसे हालात में चुनावी जंग हार्दिक और पाटिल के बीच होगी. इसलिए फिलहाल भाजपा नेतृत्व ऐसा कदम उठाएगा इसकी संभावना कम दिखाई दे रही है.

3. ऋत्विज को केंद्र में ले जाने की संभावना: मान लीजिए कि ऋत्विज को केंद्रीय संगठन में ले लिया जाए. जहां इन दिनो केंद्र में और युवा मोर्चा के पास पाटीदार नेता नहीं है.

तो सवाल यह पैदा होता है कि क्या ऋत्विक पटेल केंद्र से हार्दिक पटेल के खिलाफ चुनावी रणनीति में शिकस्त दे पाएंगे?. इसलिए उन्हें केंद्रीय संगठन में ले जाना मौजूदा हालात में मुश्किल लगता है.

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