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उत्तर-पूर्व भारत में महापर्व छठ पूजा की धूम, डूबते सूर्य को अर्घ देने की तैयारी

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आज उत्तर-पूर्व भारत के विभिन्न राज्यों में महापर्व छठ पूजा (Chhath Puja) का त्योहार मनाया जा रहा है. हिंदू पंचांग के अनुसार परम पावन कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि से लेकर सप्तमी तिथि तक छठ पूजा (Chhath Puja) मनाई जाती है. ऐसे में आज डूबते हुए सूर्य को व्रत करने वाले अर्घ देंगे जबकि शनिवार को सुबह की पहली किरण के साथ यह महान पर्व समाप्त होगा.

कोरोना महामारी के कारण इस बार छठ पूजा (Chhath Puja) में लोगों के बीच ज्यादा चहल-पहल दिखाई नहीं दे रही है लेकिन व्रत करने वालों के उत्साह में कोई कमी नजर नहीं आ रही है.

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छठ पूजा पर स्टंप

एक दिन पूर्व भारतीय डाक विभाग की ओर से छठ महापर्व (Chhath Puja) पर माय स्टांप जारी किया गया. इस स्टांप पर 1830 ई. में गंगा तट पर छठ करतीं महिलाओं के चित्र हैं. यह पेंटिंग लंदन स्थित विक्टोरिया अलबर्ट म्यूजियम में उपलब्ध थी. पटना कलम शैली की इस पेंटिंग के आधार पर ही माय स्टांप 19 नवंबर को डाक विभाग ने जारी किया.

क्यों दी जाती है महापर्व की संज्ञा

छठ (Chhath Puja) को महापर्व की संज्ञा दी जाती है. कहते हैं कि यह आस्था और श्रद्धा का सबसे खास त्योहार है. इसलिए इसके प्रति लोगों में बहुत अधिक विश्वास है. दुनियाभर में प्रवासी बिहारी और उत्तर प्रदेश के पूर्वांच्चल में अपने-अपने क्षेत्रों के नजदीकी घाटों पर जाकर भावों सहित छठ पूजा का त्योहार मनाते हैं. छठ व्रत सूर्य भगवान, प्रकृति, उषा, जल और वायु को समर्पित है. ऐसा माना जाता है कि छठ पूजा के दिन व्रत रखने से श्रद्धा और विश्वास से रखने से नि:संतान स्त्रियों को संतान की प्राप्ति होती है.

छठ पूजा विधि

कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्टी तिथि के दिन निर्जला व्रत रखा जाता है. फिर व्रती अपने घर पर बनाए पकवानों और पूजन सामग्री लेकर आसपास के घाटों पर जाते हैं. घाट पर ईख का घर बनाकर बड़ा दीपक जलाएं. इसके बाद व्रती घाट में स्नान करते हैं और पानी में रहते हुए ही ढलते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है.

फिर घरजाकर सूर्य भगवान का ध्यान करते हुए रात भर जागरण करें इसमें छठी माता के प्राचीन गीत गाए जाते हैं. सप्तमी तिथि यानी व्रत के चौथे और आखिरी दिन सूर्य उगने से पहले घाट पर पहुंचें. इस दौरान अपने साथ पकवानों की टोकरियां, नारियल और फल भी रखें. उगते हुए सूर्य को जल श्रद्धा से अर्घ्य दें. छठ व्रत (Chhath Puja) की कथा सुनें और प्रसाद बांटे. आखिर में व्रती प्रसाद ग्रहण कर व्रत खोलें.

सोनिया गांधी ने दी शुभकामनाएं

लोक आस्था के महापर्व छठ पूजा के अवसर पर सोनिया गांधी ने समस्त देशवासियों, विशेष कर बिहार व देश के हर कोने में बिहारवासियों को बधाई और शुभकामनाएं दी हैं. उन्होंने कहा कि सूर्य की पूजा और उपासना दुनिया की अनेक प्राचीन संस्कृतियों में भिन्न भिन्न रूपों में रही है तथा भारत मे सूर्यदेव की पूजा की परंपरा आदि काल से चली आ रही है.

कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि हार, पूर्वी उत्तर प्रदेश तथा झारखंड सहित देश के अनेक स्थानों पर छठ पूजा का आयोजन बड़े पैमाने पर होने से हमें जीवन मे स्वच्छता, भाईचारे तथा मर्यादा का पालन करने का संदेश भी देता है. डूबते सूर्य की पूजा के पश्चात उदीयमान सूर्य की पूजा हमारी सर्वोच्च आस्था तथा गौरवशाली परंपरा की एक ऐसी मिसाल है जो भारत के अद्भुत संस्कृति को प्रकट करता है.

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