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सोशल मीडिया पर ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ को लेकर विवाद, बताया जा रहा है मेड इन चाइन

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विशाल मिस्त्री, राजपिपणा: कोरोना वायरस को चीन ने फैलाया है. लद्दाख की गलवान घाटी में चीनी और भारतीय सैनिकों के बीच होने वाली हिंसक झड़प में भारत के 20 सैनिक शहीद हो गए. चीन के कायराना हमले के खिलाफ पूरे देश में गुस्से का माहौल देखने को मिल रहा. लोग रास्ते पर उतकर चीनी उत्पादों का बहिष्कार करने की मांग कर रहे हैं. सोशल मीडिया पर भी चीनी उत्पादों के बहिष्कार को लेकर व्यापक अभियान चलाया जा रहा है.

लोग इस अभियान का समर्थन भी कर रहे हैं. लेकिन इसी बीच सोशल मीडिया पर “मेड इन चाइना स्टैच्यू ऑफ यूनिटी” के बहिष्कार अभियान शुरू होने पर “सरदार” प्रेमियों के बीच नाराजगी दिखाई दे रही है. खासकर जो लोग पहले से ही स्टैच्यू ऑफ यूनिटी का विरोध कर रहे थे वह इन दिनों सोशल मीडिया पर एक पोस्ट वायरल कर दावा कर रहे हैं कि अब मैं कभी स्टैच्यू ऑफ यूनिटी का दौरा नहीं करूंगा क्योंकि यह मेड इन चाइना है. अगर आप सहमत हैं तो शेयर करें.

क्यों लोग स्टेच्यू ऑफ यूनिटी को मेड इन चाइना मानते हैं

यह बात उस वक्त की है जब स्टैच्यू ऑफ यूनिटी का निर्माण अपनी प्रारंभिक अवस्था में था. उसी दौरान सोनिया गांधी के राजनीतिक सलाहकार अहमद पटेल ने ट्वीट कर कहा था कि स्टैच्यू ऑफ यूनिटी को चीनी कंपनी बना रही है. इसलिए यह मेड इन चाइना है. अहमद पटेल की इस ट्वीट की वजह से स्टैच्यू ऑफ यूनिटी देश भर के मीडिया हाउस में सुर्खियों में आ गई थी. उसी दौरान स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के निर्माण स्थल पर काम कर रहे चीनी लोगों की तस्वीरें भी वायरल हुईं थीं. इसी वजह से अब एक बार फिर से स्टैच्यू ऑफ यूनिटी बॉयकॉट अभियान जोर पकड़ लिया है. जहां एक तरफ मोदी सरकार ने कांग्रेस की स्टैच्यू ऑफ यूनिटी मेड इन चाइना के आरोपों को निराधार बताते हुए खारिज कर दिया था.

बीटीपी विधायक छोटूभाई वसावा ने कहा कि सरदार साहब की मूर्ति हटाओ!

कुछ समय पहले स्टैच्यू ऑफ यूनिटी क्षेत्र के आदिवासियों ने विभिन्न मुद्दों को लेकर विधायक छोटूभाई वसावा से मुलाकात की थी. इस दौरान उन्होंने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा था कि चीन द्वारा बनाई गई सरदार साहब की प्रतिमा को हटाया जाना चाहिए. हम आदिवासियों के साथ अन्याय नहीं होने देंगे.

गौरतलब है कि चीनी उत्पाद के रूप में स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के खिलाफ बहिष्कार का अभियान चल रहा है. जिसकी वजह से सरदार प्रेमियों के साथ ही साथ नर्मदा जिला के लोगों में भी नाराजगी दिखाई दे रही है. क्योंकि स्टैचू ऑफ यूनिटी की वजह से आदिवासियों को रोजी- रोटी मिल रही है. इतना ही नहीं इसकी वजह से ही नर्मदा जिला की लोकप्रियता भी काफी बढ़ी है.

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