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कोरोना रिपोर्ट 13: चरोतर का पापड़ कैपीटल उत्तरसंडा बना तालाबंदी का गवाह, मठिया-पापड़ उद्योग पर लगा ताला

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हितेश चावड़ा, उत्तरसंडा: दुनिया भर में पापड़ उद्योग के लिए मशहूर चरोतर का उत्तरसंडा गांव भी अब कोरोना को लेकर जारी तालाबंदी के भयंकर प्रभाव का गवाह बन रहा है. जिस गृह उद्योग से उत्तरसंडा के पापड़-मठिया की प्रशंसा होती थी वह आज बिल्कुल बंद पड़ा है. नडियाद तहसील का उत्तरसंडा पिछले महीने 21 तारीख से बंद है और रात में भी तालाबंदी का पालन किया जाता है. उत्तरसंडा गांव पूरे राज्य और दुनिया भर में अपने पापड़- मठिया उद्योग के लिए जाना जाता है.

राज्य, देश और दुनिया भर में आतंक मचाने वाले कोरोना वायरस को लेकर भारत में 21-दिवसीय तालाबंदी की घोषणा की गई. तालाबंदी के इस भयंकर दौर से आम आजमी से लेकर खास आदमी परेशान नजर आ रहा है. जब से बंद का सिलसिला शुरू हुआ है तभी से उत्तरसंडा का गृह उद्योग भी प्रभावित हुआ है. तालाबंदी के 3 मई तक बढ़ाने के बाद अब इससे भी गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं. उत्तरसंडा में पापड़-मठिया उत्पादन की सात छोटी इकाइयाँ हैं जो सालाना लाखों किलो पापड़ और मठिया का उत्पादन और बिक्री करते हैं. इन इकाइयों को लॉकडाउन के बाद बंद कर दिया गया है जिसकी वजह से यहां पर रखे कच्चे माल, 20 टन के करीब तैयार माल संग्रहीत किया है. उत्तरासंडा की आबादी 15 हजार के आसपास है यहां पर 7 पापड़ और मठिया की फैक्ट्री है. जिसका उत्पादन और बिक्री पूरी तरह से बंद हैं.

इस मामले को लेकर मठिया-पापड़ और श्रीजी ब्रांड के निर्माता कनुभाई पटेल ने कहा, “सरकार का यह फैसला बहुत स्वागत योग्य है कि तालाबंदी कर देश को कोरोना जैसी महामारी के बढ़ने पर विराम लगा दिया. इसकी वजह से धंधा उद्योग पर प्रभाव पड़ना सामान्य बात है. लंबे तालाबंदी की वजह से जल्द खराब होने वाले सामग्री को नष्ट कर दिया गया है. हमारे उत्पादों को विशेष रूप से लोग रोजमर्रा की जिंदगी में भोजन के रूप में उपयोग करते हैं. तालाबंदी के वजह से माल सप्लाई करने का चेन टूट गया है. इसलिए हम चाहते हैं कि कुछ छूट के साथ हमें धंधा करने का परमीशन मिले ताकि हमारा धंधा भी चले और लोगों को खाने पीने का सामान भी मुहैया हो सके.

तालाबंदी की वजह से उत्तरसंडा में करीब 150 से 200 लोगों के रोजगार पर सीधा असर पड़ा है. पापड़ और मठिया उद्योग से जुड़े व्यापारी और दुकानदारों के साथ ही साथ उत्पादन करने वाले लोगों को भी परेशानी से दो चार होना पड़ रहा है. तालाबंदी की वजह से श्रमिकों पैसे नहीं मिल रहे. इस कारोबार से जुड़े लोग सरकार से मांग कर रहे हैं कि तालाबंदी के इस मुश्किल वक्त में सरकार कुछ छूट के साथ धंधा करने की परमीशन दे ताकि हमारा कारोबार चले और लोगों को रोजमर्रा की जिंदगी में खाने वाला माल सामान भी मिल सके.

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