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कोरोना रिपोर्ट -17: तालाबंदी की वजह से गुजरात में मिठाई और खोया उद्योग को 100 करोड़ रुपये का नुकसान

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अनिल पुष्पांगदन,गांधीनगर: देश भर में कोरोना मामलों के बढ़ने के कारण तालाबंदी की स्थिति अभी भी स्पष्ट नहीं है. 3 मई के बाद भी तालाबंदी की स्थिति को लेकर अभी कुछ कहना जल्दबाजी होगी. लंबे तालाबंदी के बीच उद्योग-धंधा रोजगार को भारी आर्थिक झटका लगा है. ऐसे में गुजरात में मौजूद मिठाई फरसाण, बेकरी, डेयरी और खोया का उत्पादन करने वाले व्यापारियों को अनुमानित 100 करोड़ रुपये के नुकसान की रिपोर्ट मिल रही है.

गुजरात में उत्पादित होने वाली मिठाइ, विभिन्न व्यंजनों, सरसाण और खोया के उत्पादन का देश और विदेश में काफी मांग है. देश के अन्य राज्यों और शहरों में मिठाई की जितनी मांग है उतनी ही मांग गुजरात में भी है. गुजरात के लोग खाने के शौकीन माने जाते हैं, चाहे जैसी भी स्थिति हो गुजराती लोग विभिन्न मिठाइयों और व्यंजनों को खाना बंद नहीं करते. गुजरात में मिठाई, फरसाणा, डेयरी निर्माता, बेकरी, खोया उत्पादक ‘गुजरात मिठाई फरसाणा महामंडल एसोसिएशन’ चलाता है. इस एसोसिएशन के अध्यक्ष किशोरभाई शेठ के अनुसार, इस उद्योग में गुजरात, राजस्थान, मध्य प्रदेश के लगभग 20 से 25 हजार कारीगर काम करते हैं. राज्य में अनुमानित बारह से पंद्रह हजार व्यापारी इस मंडल से जुड़े हैं. जिनकी गुजरात के विभिन्न बड़े और छोटे शहरों में दुकानें हैं.


गुजरात में खोया का जो उत्पादन होता है वह ज्यादातर मध्य प्रदेश के कारीगरों द्वारा बनाई जाती है. इसी तरह बंगाली मिठाइयां भी इन्हीं कारीगरों द्वारा बनाई जाती हैं. तालाबंदी की घोषणा के बाद गुजरात में छोटे और बड़े सभी मिठाई और फणसान के जो भी सामान और अन्य व्यंजन उपलब्ध थे उन्हे पैकेट बनाकर राहत कार्य में दिया जा रहा है. सरकार ने बेकरियों और डेयरियों को लॉकडाउन के समय संचालित करने की अनुमति दी है, लेकिन मिठाई और फरसाद की दुकानें अभी भी बंद हैं जिसकी वजह से बड़ा आर्थिक झटका लगा है. बड़े शहरों में मौजूद बड़े शोरूमों में लगभग 100 से 150 कारीगर काम करते हैं. इन कारीगरों को तालाबंदी के समय व्यापारी देख-भाल कर रहे हैं, और उन्हें दूसरे अन्य सुविधा भी मुहैया करवा रहे हैं. ऐसे में अगर लॉकडाउन बढ़ाया जाता है, तो उन्हें भारी आर्थिक झटका लगेगा.

महामंडल के अध्यक्ष किशोरभाई शेठ के अनुसार, मिठाई और फरसाण उद्योग को अनुमानित 100 करोड़ रुपये नुकशान होने की उम्मीद जताई जा रही है. इसलिए वह सरकार ने 20 अप्रैल दी जाने वाली रियायत में मिठाई और फरसाण का धंधा करने वाले लोगों को शामिल करने की मांग कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि फूड और ड्रग्स विभाग के नियमों के अनुसार व्यंजन बनाने की अनुमति दी जानी चाहिए. वे वहां सामाजिक दूरी बनाए रखने की कोशिश करेंगे. ड्राय फरसाण हानिकारक नहीं है इसलिए सरकार से हमारी मांग है कि ऐसे उद्योग को राहत प्रदान करनी चाहिए.

मिठाई फरसाण महामंडल के अध्यक्ष कमलेश भाई कंदोई और मंत्री राजेश भाई पटेल ने भी गुजरात सरकार से जल्द से जल्द मदद करने की अनुरोध कर रहे हैं.

गुजरात में मिठाई और फरसाण और खोया उद्योग के साथ जुड़े 20 से 25 हजार कारीगरों को हम समझाकर अपने पास रख रहे हैं लेकिन अब तालाबंदी की मियाद बढ़ने की वजह से हालात और खराब हो रहे हैं. बड़े व्यापारियों को पार्सल का बड़ा ऑर्डर मिलने के बाद उनका खर्च निकल जाता है, लेकिन छोटे शहरों और गांवों में स्थित छोटी दुकानों के लिए राहत पैकेज की एसोसिएशन मांग कर रही है.

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