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कोरोना रिपोर्ट- 7: गुजरात में 10 लाख ऑटो रिक्शा चालक बेरोजगार, UP बिहार की बड़ी तादाद

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दीपक मसला, अहमदाबाद: गुजरात के दस लाख रिक्शा चालक तालाबंदी के इस मुश्किल वक्त में प्रसाशन की ओर से मिलने वाली मदद की उम्मीद में आस लगाए बैठे हैं. लेकिन हर दिन तालाबंदी को लेकर सख्त फैसला से ये रिक्शा चालक निराश और परेशान नजर आ रहे हैं. तालाबंदी के दौरान मदद देने के लिए गुजरात सरकार ने एक एक ऑन लाइन फॉर्म भरवाया था. अधिकारियों का कहना था कि गुजरात सरकार मोबाइल ऐप से फॉर्म भरने वाले लोगों को आर्थिक मदद देगी. लेकिन इतने दिन गुजरने के बाद अभी तक रिक्शा चालकों को कोई मदद सरकार की ओर से नहीं मिली है.

लबें तालाबंदी की वजह से अब रिक्शा चालक आवश्यक सामान भी नहीं खरीद सकते. क्योंकि अपनी जरुरतों को पूरी करने के लिए उनके पास पैसे ही नहीं हैं. जिसके बाद असंगठित मजदूरों के संगठन से मदद की अपील की. इस सिलसिले में जानकारी देते हुए असंगठित मजदूर यूनियन के अध्यक्ष अशोक पंजाबी ने कहा कि आरटीओ द्वारा रिक्शा चालकों को फार्म भरने के लिए बुलाया गया था. उस दौरान इन ड्राइवरों को भरोसा दिया था कि सरकार मोबाइल ऐप के जरिये मदद करेगी. लेकिन अब इस आश्वासन से अधिकारी इनकार कर रहे हैं. जिसकी वजह से रिक्शा चालक निराश और अपने अपने आपको ठगा हुआ मान रहे हैं.

इस सिलसिले में जानकारी देते हुए रिक्शा चालक राजवीर उपाध्याय ने कहा, “हम तालाबंदी के दौरान चालक को 9300 की आर्थिक सहायता की मांग को लेकर लिखित आवेदन किया था. लेकिन सरकार की ओर ना मिलने वाली उम्मीद तमाम रिक्शा चालकों के उम्मीदों पर पानी फेर दिया है. आज अहमदाबाद के अधिकांश रिक्शा ड्राइवर दवा, दूध जैसी प्राथमिक चीजों को खरीदने के लिए मजबूर हैं.

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