Gujarat Exclusive > गुजरात एक्सक्लूसिव > कोरोना रिपोर्ट: 2 करोड़ असंगठित गुजराती मजदूर परिवारों की दयनीय स्थिति

कोरोना रिपोर्ट: 2 करोड़ असंगठित गुजराती मजदूर परिवारों की दयनीय स्थिति

0
2666

दीपक मसला, अहमदाबाद: कोरोना वायरस के बढ़ते आतंक पर लगाम लगाने के लिए केंद्र सरकार ने 21 दिनों के लंबे तालाबंदी की घोषणा की है. लेकिन अभी तालाबंदी का बारह दिन भी नहीं पूरे हुए और देश की अर्थव्यवस्था चरमा सी गई है. बड़ी-बड़ी कंपनिया जहां छटनी का मन बना चुकी है. वहीं दूसरी तरफ नई नौकरियों का इस वक्त कोई विकल्प नजर नहीं आ रहा इतनी ही नहीं नई नौकरियों के लिए दी गई ऑफर लेटर को अब वापस लिया जा रहा है. ऐसे में अब गुजरात के 2 करोड़ गरीब मजदूरों के साथ पूरे देश के 42 करोड़ असंगठित मजदूरों की हालत खराब हो गई है. जहां एक तरफ लंबे तालांबदी की वजह से इन मजदूरों को काम नहीं मिल पा रहा वहीं केंद्र और राज्य सरकार की ओर मिलने वाली सहायता ना के बराबर है. जिसकी वजह इन लोगों को दिन ब दिन खस्ताहाली का शिकार होना पड़ रहा है.

गुजरात के दो करोड़ असंगठित मजदूरों में 18 श्रेणियों के मजदूर शामिल हैं. जिसमें चाय की लॉरी, ठेला, साइकिल की दुकान, ऑटो गैरेज, मोची, दर्जी, नाई, प्लंबर, चित्रकार, बढ़ई, लोहार, घर बनाने वाले मिस्त्री, हाथ रिक्शा, रिक्शा चालक, इलेक्ट्रीशियन, धोबी, कुम्हार, फेरिया, चौराहे पर खड़े होकर सामान बेचने वाले लोग, खेत मजदूर और माली शामिल हैं.

गुजरात की बात करें तो दो करोड़ असंगठित मजदूरों में 70 लाख खेत मजदूर और अन्य 25 लाख मजदूर लॉरी, गल्ला और रास्ते के किनारे दुकान लगाने वाले हैं. वहीं ऑटो रिक्शा चालक 10 लाख और 6 लाख रत्न कलाकार शामिल हैं.

असंगठित मजदूर कांग्रेस के अध्यक्ष अशोक पंजाबी ने इस सिलसिले में जानकारी देते हुए कहा कि केंद्र सरकार और राज्य सरकार द्वारा घोषित पैकेज में केवल 1000 रुपये देने की घोषणा की गई है. इस राशि से एक मजदूर का परिवार 21 दिनों के तालाबंदी में अपनी आजीविका कैसे चला सकता है? हमने राज्य सरकार को लिखित में आवेदन दिया है और मांग की है कि सरकार न्यूनतम रोजगार यानी 310 की राशि निर्धारित करे और घोषणा करे कि असंगठित श्रमिकों को 21 दिनों के लंबे तालाबंदी के दौरान इतना भुगतान किया जाएगा. तालाबंदी के समय गरीब मजदूरों की हालत दिन ब दिन खराब होती जा रही है. इस स्थिति में राज्य सरकार को मजदूर और उनके परिवारों की स्थिति के बारे में भी सोचना चाहिए. देश में असंगठित श्रमिकों की कुल संख्या 42 लाख है. जिनमें से कुछ अपने घर जाने की बात कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि हमने कई जगहों पर आवेदन पत्र देकर मजदूरों को भोजन व्यवस्था की है.

नर्मदा जिला के दो कैदियों ने जज से कहा, ‘सर बाहर नहीं जाना हमें जेल में ही रहना है’