Gujarat Exclusive > देश-विदेश > भारत और रूस में कोरोना मामले 7 लाख के करीब लेकिन हताहतों में दोगुने का अंतर

भारत और रूस में कोरोना मामले 7 लाख के करीब लेकिन हताहतों में दोगुने का अंतर

0
1270

देश में बढ़ते कोरोना के मामले लगातार चिंता बढ़ा रहे हैं. भारत अब दुनिया भर में कोरोना से तीसरा सबसे ज्यादा प्रभावित देश बन गया है. पहले अमेरिका, ब्राजील और रूस के बाद भारत चौथे स्थान पर था लेकिन पिछले कुछ दिनों में लगातार बड़ी संख्या में कोरोना के मामले आने के कारण भारत में रूस से ज्यादा मामले हो गए हैं. भारत और रूस में कोरोना के मामलों की कुल संख्या करीब सात लाख के आस-पास है लेकिन दोनों देशों में इस महामारी से मरने वालों की संख्या में जमीन-आसमान का फर्क है.

पूरी दुनिया से कोविड-19 के आंकड़े जुटाने वाले वर्ल्डो मीटर के अनुसार, रूस में अभी तक 6,81,251 लोग कोरोना वायरस से संक्रमित हुए हैं. वहीं ब्राजील में कोविड-19 के 15,78,376 मामले हैं और सबसे ज्यादा मामले अमेरिका में हैं जिनकी संख्या 29,54,999 है. भारत में अभी तक 6,95,396 लोग कोरोना वायरस से संक्रमित हुए हैं जबकि संक्रमण से कुल 19,683 लोग की मौत हुई है  जबकि रूस में 6 लाख 81 हजार 251 मरीज हैं.

भारत और रूस में कोरोना से होने वाली मौत की तुलना करें तो बहुत बड़ा फर्क नजर आता है. जहां अब तक कोरोना से भारत में 19,693 मौतें हुई हैं तो वहीं रूस में 10,296 लोगों की मौत हुई है. यानी करीब-करीब दोगुने का फर्क है. वहीं रिकवर होने वाले मरीजों की संख्या भी भारत के मुकाबले रूस में ज्यादा है.

आंकड़ों का गणित देखें तो भारत में 6.95 लाख केस होने में 158 दिन लगे. भारत में रोजाना औसतन 22 हजार से ज्यादा नए मरीज मिल रहे हैं. भारत में जून में 3 लाख 87 हजार 425 मामले सामने आए. यहां 21 जून के बाद से हर दिन 15 हजार से ज्यादा मामले मिल रहे हैं. वहीं, हर दिन सामने आने वाले मामलों में 4 जुलाई को यहां सबसे ज्यादा 24 हजार 18 मरीज मिले.

रूस में संक्रमण के सबसे ज्यादा मामले मई में मिले. इस महीने यहां सबसे ज्यादा 2 लाख 91 हजार 412 केस की पुष्टि हुई. हर दिन सामने आने वाले मामलों में यहां 11 मई को सबसे ज्यादा 11 हजार 656 केस मिले. भारत में संक्रमण का पहला मामला 30 जनवरी को सामने आया था. इसके 110 दिन बाद यानी 10 मई को यह संख्या बढ़कर एक लाख हुई. रूस में संक्रमण का पहला मामला 31 जनवरी को सामने आया. इसके 91 दिन के बाद यानी 30 अप्रैल को यहां मरीजों की संख्या 1 लाख के पार हुई.

चीन में अब ‘काली मौत’ का साया, ब्यूबानिक प्लेग से पहले भी हुई हैं करोड़ों मौतें