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दिल्ली विधासनभा चुनाव 2020 : किसके सर सजेगा दिल्ली का ताज, फैसला आज

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नई दिल्ली : दिल्ली विधासनभा चुनाव 2020 के नतीजे की घड़ियां बस चंद घंटे की दूरी पर हैं. कुछ घंटों बाद यह तय हो जाएगा कि दिल्ली की सत्ता अगले पांच वर्षों तक किसके हाथों में रहेगी. आज ये तय हो जाएगा कि क्या भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सत्ताधारी आम आदमी पार्टी (आप) की मंशा पर विराम लगाकर कुर्सी हथियाने में कामयाब रहेगी या फिर कांग्रेस कोई चमत्कारिक नतीजे के साथ दिल्ली में वापसी करेगी.

पिछले शनिवार को मतदान के साथ दिल्ली की 70 विधानसभा पर खड़े उम्मीदवारों की किस्मत ईवीएम मशीनों में कैद हो गई थी. इसके बाद एग्जिट पोल के मुताबिक अरविंद केजरीवाल की अगुआई वाली आम आदमी पार्टी को पूर्ण बहुमत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है. अब से कुछ ही घंटों के बाद इन उम्मीदवारों की किस्मत का पिटारा खुलना शुरू हो जाएगा, मंगलवार को दिल्ली विधानसभा की सभी सीटों के परिणाम घोषित कर दिए जाएंगे.

क्या पुराना इतिहास दोहरा पाएगी आप ?

लोकसभा चुनाव 2019 में दिल्ली की सभी 7 लोकसभा सीटों पर बीजेपी ने कब्जा जमाया था, लेकिन विधानसभा चुनाव में तस्वीर कुछ और ही नजर आ रही है. चुनाव के बाद सभी एग्जिट पोल्स और सर्वे दिल्ली आम आदमी पार्टी की सरकार बनने का दावा कर रहे हैं. मालूम हो कि साल 2015 में आम आदमी पार्टी ने दिल्ली की 70 सीटों में से 67 सीटें जीतीं थीं.

क्या मनोज तिवारी का दावा होगा सत्य ?

दिल्ली विधानसभा चुनाव के सभी एग्ज़िट पोल जहां आम आदमी पार्टी की सत्ता में वापसी का इशारा कर रहे हैं. वहीं दिल्ली बीजेपी के अध्यक्ष मनोज तिवारी के एक दावे ने लोगों में बेचैनी पैदा कर दी है. दरअसल, दिल्ली में मतदान रुकने के बाद मनोज तिवारी ने एक ट्वीट किया था. उन्होंने लिखा कि ‘ये सभी एग्ज़िट पोल फ़ेल होंगे. मेरा ये ट्वीट संभाल कर रखियेगा. भाजपा दिल्ली में 48 सीट लेकर सरकार बनायेगी. कृपया ईवीएम को दोष देने का अभी से बहाना ना ढूँढे.’

कांग्रेस का लंबा इतिहास

आजादी के बाद से अब तक दिल्ली में सात मुख्यमंत्री ही रहे हैं. 1952 में दिल्ली राज्य के अस्तित्व में आने के बाद चौधरी ब्रह्मप्रकाश यादव पहले मुख्यमंत्री बने. इसके बाद गुरमुख निहाल सिंह ने मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी संभाली. ये दोनों ही मुख्यमंत्री कांग्रेस के थे. इसके बाद 1956 से 1993 तक करीब 37 साल तक दिल्ली में मुख्यमंत्री का पद नहीं रहा. इसके बाद बीजेपी के मदन लाल खुराना 1993 में गैर कांग्रेसी और दिल्ली के तीसरे मुख्यमंत्री बने. कांग्रेस की शीला दीक्षित दिल्ली की पहली ऐसी मुख्यमंत्री बनी जिन्होंने लगातार 15 साल तक सत्ता में रहीं. हालांकि इस बार कांग्रेस की वापसी की उम्मीद बहुत कम है.