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किसानों के आंदोलन का 37 वां दिन, कानून को रद्द करने की मांग पर अड़े अन्नदाता

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केंद्र सरकार और किसान संगठनों के बीच अबतक कई दौर की बैठक हो चुकी है बावजूद इसके अभी तक कोई ठोस नतीजा नहीं निकला है. किसानों का आंदोलन 37वें दिन भी जारी है. Demand to repeal agricultural law

इस बीच जानकारी सामने आ रही है कि किसानों के आंदोलन के कारण आज चिल्ला और गाजीपुर बॉर्डर पूरी तरह से बंद कर दिया गया है. बीते दिनों किसान नेताओं की ओर से बातचीत के लिए 4 प्रस्ताव रखे गए थे.

इस बैठक में दो मुद्दों पर किसान और सरकार के बीच आपसी सहमति बनी थी. लेकिन एमएसपी और कृषि कानून को लेकर बात नहीं बन पाई थी.

इसलिए अगले दौर की बैठक 4 जनवरी को फिर से आयोजित की जाएगी.

रणनीति बनाने के लिए किसान संगठनों की बैठक  Demand to repeal agricultural law

अगले दौर की बैठक 4 जनवरी को एक बार फिर से आयोजित की जाएगी उससे पहले आज सिंघु बॉर्डर पर आज 80 किसान संगठनों की 2 बजे बैठक आयोजित होगी. इस बैठक में आगे की रणनीति बनाई जाएगी.

इससे पहले किसान और सरकार के बीच सातवें दौर की बातचीत में दो मुद्दों पर आपसी सहमति बनी थी. लेकिन एमएसपी और कृषि कानून पर जैसे दो अहम मुद्दों पर सहमति नहीं बन पाई थी.

कानून को रद्द करने की मांग पर अड़े अन्नदाता Demand to repeal agricultural law

इस बीच जानकारी सामने आ रही है कि किसान नेताओं ने दो टूक कहा है कि एमएसपी के लिए कानूनी गारंटी और नए कृषि कानूनों को रद्द करने का कोई विकल्प नहीं है. Demand to repeal agricultural law

किसान और सरकार के बीच ठनी रार खत्म होने का नाम नहीं ले रही. राजधानी दिल्ली की अलग-अलग सीमाओं पर डटे किसान पिछले 37 दिनों से आंदोलन कर रहे हैं.

इस बीच जानकारी सामने आ रही है कि सरकार ने साफ कर दिया है कि कानून को रद्द नहीं किया जाएगा. हां संशोधन के लिए सरकार जरूर तैयारी दिखा रही है.

गौरतलब है कि मुख्य रूप से पंजाब और हरियाणा के हजारों किसान राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की अलग-अलग सीमाओं पर एक महीने से ज्यादा समय से प्रदर्शन कर रहे हैं. Demand to repeal agricultural law

उनकी मांग है कि तीनों नए कृषि कानूनों को रद्द किया जाए. बीते दिनों होने वाली बैठक के बाद सरकार की ओर से दावा किया गया था कि आधे विवाद को सुलझा लिया गया है.

लेकिन हकीकत यह है कि एमएसपी और कानून को रद्द करने की मांग पर अभी तक पेच फंसा हुआ है. इन मुद्दों को हल करना सरकार के लिए आसान नहीं है.

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