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कोरोना से जिंदगी की जंग हार गए डॉ. ओसामा, मरने से पहले कही थी बड़ी बात

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कोरोना का भयावह रूप दुनिया देख रही है. अमीर से लेकर गरीब तक और बच्चे लेकर बूढे तक इसकी चपेट में आते जा रहे हैं. चीन से पनपा यह वायरस अब दूसरे देशों में अपनी पकड़ मजबूत कर चुका है और कुछ बचे देश भी इसकी गिरफ्तर में आते जा रहे हैं. पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान भी इससे अछूता नहीं है. उत्तरी पाकिस्तान के गिलगित-बाल्टिस्तान में युवा डॉक्टर ओसामा रियाज की मरीजों की स्क्रीनिंग करते समय कोरोनरी वायरस के संक्रमण से मौत हो गई जिससे हर कोई सन्न है. गिलगित-बाल्टिस्तान में कोरोना से होने वाली यह पहली मौत है.

डॉ. ओसामा रियाज में कुछ दिन पहले ही कोरोना वायरस के संक्रमण की पुष्टि हुई थी. डॉ. ओसामा का संबंध गिलगित-बाल्टिस्तान के इलाके चलास से था. वह गिलगित में डिस्ट्रिक्‍ट हेड क्‍वार्टर अस्‍पताल में शुक्रवार की रात से ही उनकी हालत गंभीर बनी हुई थी. उनका इलाज जारी था. उनकी बिगड़ती हालत को देखते हुए उन्‍हें वेंटिलेटर पर रखा गया था. वह गिलगित में जायरीन की स्‍क्रीनिंग की ड्यूटी पर तैनात थे. इसी दौरान वह खुद भी कोरोना वायरस के शिकार हो गए.

गिलगित-बाल्टिस्तान के सूचना विभाग ने ‘उर्दू न्‍यूज’ से उनकी मृत्यु की पुष्टि करते हुए कहा कि ‘कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई में अहम भूमिका निभाने वाले डॉ. ओसामा रियाज कोरोना वायरस के खिलाफ इस जंग में जिंदगी की बाजी हार गए. उन्हें राष्ट्रीय नायक का दर्जा दिया जाएगा.’

डॉ. ओसामा गिलगित-बाल्टिस्तान के स्‍वास्‍थ्‍य विभाग में करीब डेढ़ साल पहले डॉक्‍टर के तौर पर नियुक्‍त हुए थे. परिवार की ओर से बताया गया है कि करीब एक सप्‍ताह पहले डॉ. ओसामा ने एफसीपीएस पार्ट वन की परीक्षा भी पास कर ली थी. कुछ दिन पहले जब उनसे कहा गया था कि वह एहतियात से काम लें और वायरस से बचाव की हर कोशिश करें तो डॉ. ओसामा का जवाब था कि जिंदगी और मौत अल्‍लाह के हाथ में है. यह वायरस कि इससे पहले समाज में फैल जाए हमें इसकी रोकथाम की जी-तोड़ कोशिश करनी चाहिए.

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