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शर्मनाक स्थिति: लाखों बेरोजगार गुजराती और मुठ्ठीभर नौकरी, CM के जिले में एक को भी नौकरी नहीं

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हितेश चावड़ा, गांधीनगर: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की अहमदाबाद यात्रा पर 100 करोड़ से ज्यादा खर्च कर गरीबों की झोपड़ियों को ढकने की नाकाम कोशिश करने वाली रुपाणी सरकार अब गुजरात के शिक्षित बेरोजगारों के साथ क्रूर मजाक कर रही है. गुजरात सरकार ने विधानसभा में बजट सत्र के दौरान कितने लोगों को सरकारी नौकरी दी गई है इसका आंकड़ा जारी किया है. कुल 4.58 लाख बेरोजगारों में से दो साल में केवल 2,223 को ही सरकारी नौकरी दी गई है. इससे भी हैरानी वाली बात ये सामने आई कि गुजरात के कुछ 33 जिलों में से 14 जिले तो ऐसे हैं जहां एक भी व्यक्ति को सरकारी नौकरी नहीं दी गई है.

रंगारंग इवेंट प्रेमी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा तत्कालीन मुख्यमंत्री के रूप में शुरू हुआ “वाइब्रेंट गुजरात” और ऐसे दर्जन भर खर्चालू कार्यक्रम से गुजरात को कुछ हासिल होने की जगह लगातार आर्थिक छति पहुंचती रही है. व्यापक प्रचार-प्रसार से “मॉडल स्टेट” बने गुजरात में बेरोजगारी पिछले एक दशक में मुख्य समस्या के रूप में उभर कर आई है. गुजरात के नौजवान तबके के लोगों को रोजगारी दिलवाने के नाम से गुजरात गत वर्षों में कई हिंसक-अहिंसक आंदोलनों के दौर से गुजर चुका है लेकिन इन तमाम आंदोलनों से बेरोजगारों की समस्या में किसी तरह का कोई बदलाव नहीं आया है. बावजूद इसके सरकार गुजरात सरकार हर साल 1 लाख नौजवानों को नौकरी मुहैया करवाने का एक बार नहीं बल्कि कई बार झूठा दावा कर चुकी है.

भाषण, और चुनावी सभा में जिस तरीके से गुजरात मॉडल स्टेट दिया जा रहा है. विधानसभा में बिल्कुल उससे हटकर तस्वीर सामने आ रही है. साल में 1 लाख नौजवानों को सरकारी नौकरी देने का दावा करने वाली रुपाणी सरकार की पोल गुजरात विधानसभा में खुल गई जब श्रम और रोजगार मंत्री ने लिखित में जवाब दिया. गुजरात विधानसभा में विभिन्न जिलों में बेरोजगारी और सरकार के साथ-साथ निजी नौकरियों की जानकारी दी गई. श्रम और रोजगार मंत्री ने लिखित रूप में कहा, कि राज्य ने 2 वर्षों में कुल 4,58,096 बेरोजगारों को पंजीकृत किया है, जिनमें से 4,34,663 शिक्षित हैं और 23433 अर्ध-शिक्षित बेरोजगार हैं. इनमें से 2230 को सरकारी नौकरी और 7,32,139 निजी नौकरियां दी गई हैं. गांधीनगर जिले में 329, बनासकांठा 268 में जबकि मेहसाणा जिला में 245 नौजवानों को सरकारी नौकरी देने में रुपाणी सरकार को कायाबी मिली है.

विधानसभा के बजट सत्र में जो जानकारी दी गई है वह चुनावी सभा और भाषणों से बिल्कुल अलग है, 14 जिलों में राज्य सरकार एक भी नौजवान को सरकारी नौकरी देने में कामयाब नहीं हुई है. इतना ही नहीं जिस विधानसभा से चुनाव जीतकर रुपाणी विधानसभा में पहुंच रहे हैं यानी राजकोट के एक भी नौजवान को सरकारी नौकरी नहीं दी गई है. इसी तरीके से डांग, जूनागढ़, खेड़ा, महिसागर, मोरबी, वड़ोदरा, जामनगर, नर्मदा, भरूच, तापी, दाहोद और नवसारी के साथ-साथ सूरत भी शामिल हैं.