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सरकार ने दिया कृषि कानून पर अस्थाई रोक का प्रस्ताव, नहीं माने किसान

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किसान और सरकार (Farmers Government Talks) के बीच आज 10वें दौर की बातचीत हुई और एकबार फिर इससे कोई हल नहीं निकल पाया. आज सरकार और करीब 40 प्रदर्शनकारी किसान संगठनों की 10वें दौर की बैठक (Farmers Government Talks) हुई. यह बैठक भी बेनतीजा रही. किसानों और सरकार के बीच अब 22 जनवरी को दोपहर 12:00 बजे बैठक होगी.

बैठक (Farmers Government Talks) में सरकार ने किसानों को प्रस्ताव दिया कि एक निश्चित समय के लिए कानून पर रोक लगा दी जाए और एक कमेटी का गठन किया जाए, जिसमें सरकार और किसान दोनों हो, लेकिन किसान संगठन इस प्रस्ताव पर नहीं राजी हुए. साथ ही सरकार की ओर से ये भी अपील की गई कि इस प्रस्ताव के साथ-साथ आपको आंदोलन भी खत्म करना होगा.

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कृषि मंत्री क्या बोले

कृषि मंत्री ने कहा कि हम तीनों कानूनों पर आपके साथ बिंदुवार चर्चा के लिए तैयार हैं, लेकिन सरकार किसी भी सूरत में तीनों कानून को वापस नहीं लेगी. कृषि मंत्री ने कहा कि सरकार और किसान संगठनों के नेताओं की एक कमेटी बना देते हैं, जब तक बीच का रास्ता नहीं निकलेगा तब तक हम कानून को लागू नहीं करेंगे. सरकार ये एफिडेविट सुप्रीम कोर्ट में भी देने को तैयार हैं.

मालूम हो कि सरकार ने पिछली वार्ता (Farmers Government Talks) में किसान संगठनों से अनौपचारिक समूह बनाकर अपनी मांगों के बारे में सरकार को एक मसौदा प्रस्तुत करने को कहा था. हालांकि किसान संगठन तीनों कृषि कानूनों को निरस्त करने की अपनी मांग पर अड़े रहे.

गौरतलब है कि सरकार और किसान संगठनों के मध्य चल रही वार्ता के बीच उच्चतम न्यायालय ने 11 जनवरी को गतिरोध समाप्त करने के मकसद से चार सदस्यीय समिति का गठन किया था लेकिन प्रदर्शनकारी किसानों ने नियुक्त सदस्यों द्वारा पूर्व में कृषि कानूनों को लेकर रखी गई राय पर सवाल उठाए. इसके बाद एक सदस्य भूपिंदर सिंह मान ने खुद को इस समिति से अलग कर लिया है.

एनआईए के इस्तेमाल पर सवाल Farmers Government Talks

बैठक (Farmers Government Talks) के दौरान किसानों ने कहा है कि सरकार NIA का इस्तेमाल कर प्रदर्शन और समर्थन करने वाले लोगों को टारगेट कर रही है. वहीं, सरकार ने जवाब में कहा कि अगर कोई निर्दोष है तो उनकी लिस्ट दें, हम देखेंगे. लंच ब्रेक से पहले MSP के मुद्दे पर चर्चा हुई. किसानों ने NIA का मुद्दा भी उठाया.

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