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भाकपा-माले भी कृषि बिल के खिलाफ, पटना में सड़कों पर उतरे कार्यकर्ता

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देश में कृषि बिल (Farmers Law) को लेकर किसानों द्वारा विरोध प्रदर्शन जारी है. इसी बीच अब भाकपा माले कार्यकर्ताओं ने सोमवार को इस बिल (Farmers Law) के खिलाफ बिहार के तमाम जिलों में धरना प्रदर्शन किया. इसके अलावा पूर्वी उत्तर प्रदेश के कुछ जिलों में भी धरना प्रदर्शन देखने को मिला. उन्होंने केंद्र सरकार द्वारा पारित कृषि बिल (Farmers Law) को वापस लेने की मांग की.

पटना के कारगिल चौक पर वाम दलों द्वारा विरोध सभा (Farmers Law) का आयोजन किया गया, जिसमें पार्टी के महासचिव कॉमरेड दीपंकर भट्टाचार्य शामिल हुए. दीपांकर के साथ पार्टी के कई नेता और कर्ताकर्ता भी शामिल हुए.

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सभा का संचालन किसान नेता उमेश सिंह ने किया. पटना के अलावे भोजपुर, सिवान, अरवल, जहानाबाद, गोपालगंज, दरभंगा, मुजफ्फरपुर, नालंदा, वैशाली, बक्सर, गया, नवादा, मधुबनी आदि जिलों में विरोध सभा का आयोजन किया गया.

क्या बोले दीपांकर भट्टाचार्य

पटना के कारगिल चौक पर विरोध सभा को संबोधित करते हुए माले महासचिव दीपांकर ने कहा कि आज पूरे देश में एक ही मुद्दा है. पिछले तीन दिनों से दिल्ली की सीमा को किसानों ने चारों तरफ से घेर रखा है. ऐसा लगता है कि देश की मोदी सरकार किसानों से जंग लड़ रही है. किसानों का यह गुस्सा अचानक नहीं फूटा. जिस प्रकार से राज्यसभा में संविधान व लोकतंत्र की हत्या करके इन तीनों कानूनों (Farmers Law) को पारित करवाया गया, उसने किसानों के अंदर संचित गुस्से का विस्फोट कर दिया है. उन्होंने कहा कि आज इन कानूनों के खिलाफ पूरे देश के किसान आंदोलित हैं. तीनों काले कानूनों पर किसानों का पक्ष पूरी तरह सही है.

शाहीन बाग से की तुलना

दीपांकर ने आगे कहा कि गलत कृषि बिल (Farmers Law) के खिलाफ यह किसानों का शाहीनबाग खड़ा हो रहा है. श्रम कानूनों में संशोधन के खिलाफ मजदूर लड़ रहे हैं, नागरिकता अधिकार कानून के खिलाफ देश की जनता लड़ रही है और अब इन तीन कानूनों के खिलाफ किसान उठ खड़े हुए हैं. आज जरूरत है कि सभी तबके एक दूसरे की मदद करे और मोदी सरकर पर निर्णायक हल्ला बोले. बिहार से लेकर पूरे देश में किसानों में गुस्सा है.

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