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GST विवाद गहराया, ममता सहित 6 राज्यों के सीएम ने पीएम मोदी को लिखा पत्र

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वस्तु एवं सेवा कर (GST) बकाए को लेकर विवाद गहराता जा रहा है. ताजा स्थिति ये है कि कई राज्य केंद्र सरकार द्वारा दिए गए विकल्प को मानने को तैयार नहीं हैं. अब जीएसटी (GST) मुआवजे के मुद्दे पर छह गैर-बीजेपीशासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखी है जिसमें ममता बनर्जी भी शामिल हैं.
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेटर लिखकर मांग की है कि केंद्र सरकार खुद उधार लेकर राज्यों को जीएसटी (GST) बकाया दे.

चिट्ठी में इन राज्यों ने केंद्र को उसके ‘संवैधानिक कर्तव्यों’ की याद दिलाते हुए जीएसटी (GST) मुआवजे को लेकर एक ‘स्थायी विकल्प’ ढूंढने को कहा है.

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केंद्र से कहा गया है कि वो जीएसटी मुआवजे में 2.35 लाख करोड़ के बकाए को भरे.

किस-किस ने लिखी चिट्ठी

यह चिट्ठी दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री ई पलानीसामी, तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव, केरल के मुख्यमंत्री पिनरई विजयन और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने लिखी है.
उन्होंने मांग रखी है कि केंद्र सरकार राज्यों को बाजार से अलग-अलग से उधार लेने के बजाय खुद जरूरत के हिसाब से उधार ले और जीएसटी सेस को 2021/22 के पार बढ़ाकर बकाया भरा जाए.

ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में यह भी याद दिलाया है कि गुजरात के मुख्यमंत्री रहने के दौरान नरेंद्र मोदी ने भी जीएसटी (GST) लागू करने का विरोध किया था.

ममता बनर्जी ने लिखा है,

मुझे पूरा भरोसा है कि राज्य ऐसे समाधान के लिए सहयोग करेंगे कि सेस संग्रह को पांच साल के बाद तब तक जारी रखा जाए, जब तक केंद्र सरकार इस कर्ज का ब्याज सहित पूरा भुगतान नहीं कर देती.

केजरीवाल ने लिखा है,

राज्यों का शोषण करने वाला बोझ डाला जा रहा है, जो पहले ही रेवेन्यू कलेक्शन में कमी आने और कोविड-19 के खिलाफ लड़ाई में अतिरिक्त खर्च का बोझ उठा रहे हैं.

पलानीसामी ने लिखा,

राज्यों को उधार लेने को कहा जा रहा है…ताकि मुआवजे की भरपाई की जा सके….यह प्रशासकीय तौर पर परेशानी है….और ज्यादा खर्चीला है.

उन्होंने कहा कि रेटिंग एजेंसियों को इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता है कि उधार कौन ले रहा है.

वहीं केसी राव ने कहा कि केंद्र सरकार राज्यों को जीएसटी मुआवजा देने की अपनी जिम्मेदारी निभाने का वादा तोड़ने की स्थिति में है.

केरल के मुख्यमंत्री पिनरई विजयन ने ट्विटर पर चिट्ठी शेयर करते हुए लिखा,

‘GST मुआवजे की भरपाई के लिए राज्यों को उधार का विकल्प दिया जाना GST को संवैधानिक रूप से लागू किए जाने से पहले हुए समझौते की भावना से मेल नहीं खाता है.

क्या है पूरा मामला

मालूम हो कि वस्तु एवं सेवा कर (GST) काउंसिल की 41वीं बैठक 27 अगस्त को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अगुवाई में हुई थी.
वित्त मंत्री ने बताया कि राज्यों को उनके जीएसटी बकाये के ​भुगतान के लिए 2 विकल्प दिए गए हैं.
पहले विकल्प के मुताबिक, रिजर्व बैंक की सलाह से राज्यों को एक विशेष विंडो दिया जाए ताकि वे वाजिब ब्याज दर पर 97,000 करोड़ रुपये रकम उधार हासिल कर पायें.

वहीं दूसरे विकल्प के मुताबिक, राज्य एक विशेष विंडो के द्वारा समूचे जीएसटी कम्पेनसेशन की कमी के बराबर यानी 2.35 लाख करोड़ रुपये का उधार ले सकें.
दोनों विकल्पों पर राज्यों को 7 दिन के भीतर अपनी राय देने को कहा गया. लेकिन इसको लेकर कई राज्यों ने विरोध दर्ज कराया है.

वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा था कि अर्थव्यवस्था और सिकुड़ सकती है, जिससे कि मुआवजा भरना मुश्किल होगा. इस पर गैर-बीजेपी शासित राज्य कड़ा रुख अपना रहे हैं. सोमवार को 6 गैर-बीजेपी शासित राज्यों- केरल, छत्तीसगढ़, पंजाब, दिल्ली, तेलंगाना और पश्चिम बंगाल के जीएसटी इन-चार्ज मंत्रियों ने ऑनलाइन मीटिंग भी की थी.

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