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सूदखोरों के खिलाफ गुजरात डीजीपी की लाल आंख, कड़ी कार्रवाई का आदेश

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  • सूदखोरों के खिलाफ मनीलेंडर्स अधिनियम के तहत सख्त कार्रवाई करने के लिए परिपत्र जारी
  • पासा सहित कानूनी प्रावधान का उपयोग करने का निर्देश
  • पठानी अंदाज में पैसा वसूली करने वालों पर तत्काल शिकायत दर्ज करने का आदेश

गांधीनगर: गुजरात में सूदखोरी के आतंक को खत्म करने के लिए गुजरात सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. राज्य में पिछले दिनों लागू होने वाले गुंडा एक्ट में सूदखोरी के मामले को शामिल कर लिया गया है.

इसलिए अब सूदखोरी की गैरकानूनी गतिविधि में शामिल लोगों को भी इस कानून के तहत जेल में डाला जा सकता है.

गुजरात में अब सूदखोरों के खिलाफ होगी कड़ी कार्रवाई

सूदखोरों के द्वारा व्याज का पैसा वसूलने के लिए लोगों के उत्पीड़न के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के लिए राज्य पुलिस द्वारा आदेश दिया गया है. गुजरात में जरूरतमंद लोग अवैध रूप से उच्च ब्याज दरों पर पैसे उधार लेते हैं.

ब्याजखोर के चंगुल में फंसने वाले लोगों को कई गुना ज्यादा ब्यान देना पड़ता है. कुछ मामलों में तो ऐसा होता है कि सूदखोरों की आंतक से पैसा लेने वाला आदमी परेशान होकर आत्महत्या तक कर लते हैं.

लेकिन अब सूदखोरी के इस धंधे में शामिल लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी.

जबरन वसूली करने वालों पर लगेगा पासा

ब्याज पर पैसा लेने वाले लोगों को अक्सर सूदखोर परेशान कर उनकी संपत्ति भी जबरन अपने नाम लिखवा लेता है. इस बुराई पर अंकुश लगाने के लिए गुजरात के डीजीपी आशीष भाटिया ने एक विशेष आदेश जारी किया है.

भाटिया ने पुलिस को इस तरह की घटनाओं में तुरंत शिकायत करने और कानूनी कार्रवाई करने का आदेश जारी किया है.

जबरन वसूली करने वालों के खिलाफ मामला दर्ज करके, सबूतों के आधार पर आरोपियों को तुरंत गिरफ्तार करने का आदेश दिया गया है. ताकि आरोपियों की अग्रिम जमानत की संभावना पर भी लगाम लगाया जा सक.

ब्याज पर पैसा लेने वालों की संपत्ति भी अक्सर सूदखोर ब्याज की राशि के एवज में जब्त कर लेता है.

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ऐसे मामलों में मनीलोंडर्स अधिनियम के तहत रजिस्ट्रार द्वारा सूदखोरों से ऐसी संपत्ति को लेकर उसके मूल मालिक को वापस करने का भी प्रावधान किया गया है.

सभी पुलिस अधिकारियों को इस प्रावधान तहत रजिस्ट्रार के माध्यम से कार्रवाई करने का भी निर्देश दिया गया है.

ऐसे आरोपियों के खिलाफ PASA और द प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया है. आपराधिक गतिविधियों के माध्यम से अर्जित संपत्ति को भी जब्त किया जा सकता है.

गुजरात डीजीपी ने ऐसे आरोपियों की सूची बनाने और उनकी गतिविधियों पर नजर रखने का भी निर्देश दिया है.

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