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गुजरात के पहले कोरोना श्मशान की दुर्दशा, एम्बुलेंस की लाइट में अंतिम संस्कार

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भरूच: नर्मदा नदी के तट पर अंकलेश्वर में राज्य का पहला कोविड श्मशान स्थापित किया गया है. राज्य के पहले कोविड श्मशान में बिजली की व्यवस्था ही नहीं की गई है.

जिसके कारण रात में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है. रात में पहुंचने वाले कोरोना रोगियों के अंतिम संस्कार के लिए एम्बुलेंस के लाइट की आवश्यकता होती है.

जिसकी वजह श्मशानगृह में बिजली की सुविधा की मांग तेज हो गई है.

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कोविड रोगियों के अंतिम संस्कार के लिए तैयार किया गया था श्मशान

भरूच जिले में कोरोना रोगियों के अंतिम संस्कार को लेकर अक्सर विवाद होता रहता है. जिसके कारण जिला प्रशासन ने कोविड की वजह से मरने वाले लोगों के अंतिम संस्कार के लिए सरकारी जमीन पर एक अलग से श्मशान तैयार किया है.

जिला प्रशासन ने गोल्डन ब्रिज अंकलेश्वर में नर्मदा नदी के तट पर कोरोना मरीजों के लिए कोविड श्मसान तैयार किया गया है. भरूच-अंकलेश्वर श्मशान में कोरोना रोगियों के अंतिम संस्कार के खिलाफ स्थानीय निवासियों ने विरोध प्रदर्शन किया.

श्मशान में नहीं की गई लाइट की व्यवस्था

लगातार तीन दिनों तक जिला में विरोध प्रदर्शन किया गया. जिसके बाद जिला प्रशासन ने विवाद बढ़ने के बाद अलग कोविड श्मशान की स्थापना की. राज्य में पहली बार कोविड रोगियों के लिए एक अलग श्मशान की व्यवस्था की गई है.

लेकिन इस श्मशान में लाइट की व्यवस्था नहीं की गई है. जिसकी वजह से रात में अंतिम संस्कार करने के दौरान एम्बुलेंस की हेडलाइट का इस्तेमाल करना पड़ता है.

इसकी वजह से अंतिम संस्कार करने वाले लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है.

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