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गुजरात सरकार की नई उपलब्धि: पहले दीवार के पीछे गरीब, अब स्टीकर के पीछे किसानों की आत्महत्या

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हितेश चावडा, गांधीनगर: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के गुजरात में मुख्यमंत्री रहते शरू हुए सरकारी आंकड़ाओं में छेड़छाड़ का सिलसिला मुख्यमंत्री विजय रूपाणी के कार्यकाल में बेशर्मी सारी हदें पार करते हुए विधानसभा में प्रस्तुत किए जाते जवाबों में स्टीकर चिपकाने तक पहुंच गया है. विधानसभा में प्रस्तुत जवाब को स्टिकर के नीचे छुपा दिया जाए तो संस्थाओं का पतन निश्चित हो जाता है. गुजरात सरकार द्वारा आज 26 फरवरी 2020 को विधानसभा में बजट सत्र के दौरान एक तारांकित प्रश्नों के जवाब में पुराने प्रिंटेड जवाब पर स्टिकर चिपकाकर नया जवाब प्रस्तुत किया गया. नये जवाब के मुताबिक, किसानों के आत्महत्या के मुद्दे पर सरकार को कुछ नहीं मालुम और “किसान व्यक्तिगत कारणों से आत्महत्या कर रहे हैं”.

इसी सप्ताह अमेरिकन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जब अहमदाबाद का दौरा करने वाले थे तब रूपाणी सरकार ने एक दिवाल के पीछे गरीबों को छुपाकर गुजरात मॉडल का नायाब कारनामा देश-विदेश के सामने प्रस्तुत किया था. जिसके बाद अब नई सिद्धि हासिल करते हुए विधानसभा में किसानों के आत्महत्या के मुद्दे पर जो “प्रथम जवाब” प्रिन्टेंड था उसके उपर स्टीकर चिपका दिया और नया जवाब दिया कि, सरकार को किसानों द्वारा आत्महत्या करने के कारण का पता नही हैं, “किसान अलग-अलग व्यक्तिगत कारणों से आत्महत्या कर रहे हैं”.

गुजरात के पश्चिमी तट पर आने वाले गीर सोमनाथ जिले के उना विधानसभा क्षेत्र के विधायक पूंजाभाई वंश ने पूछा था कि, “किसानों के आत्महत्या के पीछे मुख्य कारण क्या हैं”. जिसके जवाब में सरकार द्वारा विधानसभा में दिए जाने वाले तारांकित प्रश्नों के पूर्व प्रिन्टेड जवाब में 3 कारण लिखे गए थे,
1) किसान फसल के निष्फल होने के डर से आत्महत्या कर रहे हैं.
2) किसानों पर कर्ज का बोज होने के कारण आत्महत्या कर रहे हैं.
3) किसानो द्वारा बैंक से लिए जा रहे कर्ज की भरपाई, फसल के बरबाद होने के कारण अक्षम किसान आत्महत्या कर रहे हैं.
परंतु सरकार ने उपरोक्त जवाब पर स्टिकर चीपकाकर विधानसभा में नया जवाब प्रस्तुत किया, “किसानों के आत्महत्या करने के अलग-अलग व्यक्तिगत कारण हो सकते हैं.”

इस मामले को लेकर जाम-जोधपुर के विधायक चिराग कलारिया, उना के विधायक पूंजाभाई वंश, धोराजी के विधायक ललित वसोया, खेडब्रह्मा के विधायक अश्विन कोटवाल, धंधुका के विधायक राजेश गोहिल, तालाला के विधायक भगा बारड, धारी के विधायक जेवी कावडिया ने किसानों की आत्महत्या के बारे में प्रश्न पूछा था. जिसमें राज्य में किसानों की आत्महत्या के बारे में ब्यौरा मांगा गया था.

स्टीकर चीपकाने के इस पुरे घटनाक्रम पर नेता प्रतिपक्ष परेश धनाणी ने सरकार पर सच्चाई को छिपाने और राज्य की वास्तविकता पर एक स्टीकर लगाकर लोगों को धोखा देने का आरोप लगाया, “हमने पूरे गुजरात से ऐसे सवालों को उठाया, सरकार ने अपनी पुरानी किताब में किसानों की आत्महत्या के कारणों को दिखाया है. सरकार ने जो किताब विधान सभा में रखी है, उसमें किसी स्टीकर को लगा देने से सच्चाई नही छिप जाएगी. सरकार को गंभीर होकर इसका समाधान खोजने का प्रयास करना चाहिए.”

वहीं इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप के पूर्व संपादक और राजनीतिक समीक्षक प्रो.हरि देसाई ने कहा, “भले ही अहमदाबाद की दीवार के पीछे गरीबी को छिपाने की कोशिश की गई हो, लेकिन सच्चाई को छुपाया नहीं जा सकता, दीवार के पीछे छीपे गरीब-गुरबों की तस्वीर यूएस-लंदन के अखबारों ने चस्पा की हैं. किसानों की आत्महत्या वास्तविकता है, यह सच छुपाया नहीं जा सकता, आप कितनी भी कोशिश करो.”

सवाल पूछने वाले ऊना के विधायक पूंजाभाई वंश ने कहा, “आमतौर पर ऐसा होता है कि, एक बार प्रश्न दर्ज हो जाए और अनुमोदित हो जाए, फिर सरकार जवाब देने के लिए बाध्य होती है, लेकिन जब सरकार को लगता है कि उसकी इज्जत चली जाएगी और कड़वी सच्चाई जनता तक पहुंचेगी, ऐसे में सरकार विधानसभा अध्यक्ष को लिखकर प्रश्न रद्द करवा लेती हैं. लेकिन यहाँ तो प्रश्न का जवाब भी आ गया था और जवाब प्रिन्ट भी हो गया था. ऐसे में स्टीकर चिपकाना अनैतिक है. क्योंकि, पूर्व जवाब जो दिया गया था और प्रिन्ट हुआ था वह तथ्य और तर्को पर आधारित था जिसको सरकार ने स्टीकर के पीछे छुपा दिया.”