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गुजरात में डॉक्टरों की कमी, स्वास्थ्य योजनाओं का लगा ढेर, नीति से कोसों दूर रुपाणी सरकार

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गांधीनगर: गुजरात हर दिन बीमार हो रहा है. सरकार ने गुजरात के स्वास्थ्य में सुधार के लिए कई योजनाओं की घोषणा की है, बावजूद इसके गुजरात बीमारी से पीड़ित है. राज्य में कुपोषित बच्चों की संख्या सिर्फ छह महीने में तीन गुना बढ़ गई है. सरकार की कई योजनाओं के बावजूद राज्य में स्वास्थ्य सेवाएं क्यों बीमार पड़ी है ये एक बड़ा सवाल है. लेकिन विधानसभा में शुरु बजट सत्र में सरकार के जवाब के बाद धीरे-धीरे कई हकीकत से पर्दा उठ रहा है.

गुजरात हर दिन बीमारी की चपेट में आ रहा है? इस सवाल का जवाब आज हम आपको देंगे. गुजरात सरकार गुजरातियों के बेहतर स्वास्थ्य के लिए दवा खरीदने या फिर नई होस्पीटल के निर्माण करवाने बिल्कुल पीछे नहीं हट. लेकिन बुनियादी जरूरतों को सरकार नजर अंदाज कर रही है. लोगों को नई जिंदगी देने वाले “डॉक्टर” गुजरात के पास हैं ही नहीं तो फिर योजना, दवा और अस्पताल बनवाने से क्या गुजरात सेहतमंद बन जाएगा?

गुजरात विधानसभा में स्वास्थ्य मंत्री नितिन पटेल ने जानकारी देते हुए बताया कि वर्ष 2018 व 19 में राज्य के कॉलेजों से 2,228 छात्रों ने बैचलर ऑफ मेडिसिन एंड बैचलर ऑफ सर्जरी की डिग्री ली. उन्हें प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में एक साल तक के लिए तैनात किया गया, लेकिन केवल 321 ने योगदान दिया. जबकि राज्य में प्राथमिक और जन स्वास्थ्य केंद्रों में 55% डॉक्टरों के पद खाली हैं. मुख्य महानगरीय सिविल अस्पताल में 35 से 45% डॉक्टरों की जगह खाली हैं. जबकि राज्य की सिविल अस्पतालों-पैरा अस्पतालों में पैरा मेडिकल स्टाफ के 60 प्रतिशत खाली पदों को भरने में दिलचस्पी नहीं दिखा रही है. इसलिए सवाल ये उठता है कि सिर्फ योजना, दवा और अस्पताल बनवाने से क्या गुजरात सेहतमंद बन जाएगा? या डॉक्टरों की उपलब्धता को भी आवश्यक माना जाएगा.

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गुजरात सरकार डॉक्टरों के बिना गुजरात को स्वास्थ्य बनाने के लिए निकली है. एक अन्य समस्या यह है कि राज्य की सिविल और सरकारी अस्पतालों में आउट सोर्सिंग और संविदात्मक आर्थिक शोषण स्वास्थ्य सेवाओं को गंभीर रूप से प्रभावित कर रहा है. कई जिलों के सरकारी अस्पतालों को निजी हाथों में सौंप दिया गया है. राज्य की बाल रोग, स्त्री रोग, मानसिक रोग सहित 65% विशेषज्ञ डॉक्टरों की जगह खाली पड़ी है.

राज्य में प्रतिदिन नवजात शिशुओं का मृत्यु दर और कुपोषित बच्चों की संख्या में वृद्धि होने के अनेक कारणों में से डॉक्टरों की कमी भी एक वजह मानी जा रही है. ऐसी स्थिति के बीच गुजरात अपने स्वास्थ्य को कैसे मजबूत कर सकता है? गुजरात सरकार भले ही बड़ी-बड़ी योजनाओं की घोषणा कर ले, लेकिन लोगों के इलाज के लिए डॉक्टर के रिक्त पदों को कब भरेगी? योजनाओं को सफलतापूर्वक कैसे लागू किया जा सकता है? इनमें से ज्यादातर सवालों के जवाब समान है. लेकिन शायद सवाल का जवाब मिल गया है कि गुजरात हर दिन सिर्फ और सिर्फ डॉक्टरों की कमी की वजह से बीमारी की चपेट में आ रहा है.

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