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गुजरात पुलिस आतंकियों के तरह कर रही है व्यवहार, कभी वापस नहीं लौटेंगे…

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लॉकडाउन के 40 दिन बीतने बाद भी प्रवासी मजदूरों अपने घर नहीं जा पाए हैं. प्रशासन से बढ़ती नाराजगी और असंतोष के चलते प्रवासी मजदूर एक बार फिर सड़कों पर उतर आए और घर भेजने की मांग करने लगे. सूरत में पुलिस और मजदूरों के बीच हिंसक झड़प हुई जिसके बाद पुलिस को आंसू गैस का सहारा भी लेना पड़ा. सभी मजदूर यूपी, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल वगैरह राज्यों के रहने वाले हैं और घर भेजने की मांग पर अड़े हैं.

23 मार्च को जबसे गुजरात में लॉकडाउन घोषित हुआ है, तबसे अब तक सूरत में प्रवासी मजदूर और पुलिस कई बार आमने-सामने आ चुके हैं. सोमवार को हिंसा तब शुरू हुई जब मजदूरों के एक बड़े समूह ने वरेली में पुलिस पर पथराव शुरू कर दिया. वाहनों में भी तोड़फोड़ की गई. इस समूह में महिलाएं भी शामिल थीं.

ये मजदूर शुक्रवार रात को अपने घर के लिए निकले थे लेकिन गुजरात सीमा से वापस लौटाए जाने के चलते नाराज थे. पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए 40 आंसू गैस छोड़े और लाठीचार्ज किया. इसके वीडियो सामने आए जिसमें पुलिस लाठी लेकर मजदूरों को गलियों में दौड़ाते हुए नजर आई. इस घटना के बाद 200 लोगों को हिंसा फैलाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है. आईजी (सूरत रेंज) राजकुमार ने बताया, ‘करीब 3,000 मजदूरों हिंसा में शामिल थे जिनमें से कुछ ने पुलिस पर ऐसिड की बोतलें भी फेंकी.

प्रवासी मजदूरों ने कहा कि गृह मंत्रालय के छूट के बाद भी गुजरात में फंसे प्रवासी मजदूरों को लेकर राज्य सरकार क्या कर रही है इसे लेकर कोई स्पष्टता नहीं है जिससे लेकर प्रवासी मजदूर और ज्यादा परेशान हैं. पुलिस से लाठी खाने के बाद प्रवासी मजदूरों ने कहा ‘गुजरात में अगर हमारे साथ ऐसे ही सलूक किया गया तो हम वापस नहीं लौटेंगे. पुलिस हमारे साथ आतंकियों की तरह पेश आ रही है.

गुजरात DGP ने प्रवासी मजदूरों से कहा धीरज से लें काम, हिंसा करने वालों पर होगी कार्रवाई