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गुजरात पुलिस सिंघम फोबिया से पीड़ित, बढ़ती ज्यादतियों से लोग परेशान

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आरिफ आलम, अहमदाबाद: पिछले कुछ दिनों से गुजरात पुलिस के कई रूप देखने को मिल रहे हैं. जहां एक तरफ तालाबंदी के दौरान गुजरात पुलिस के कुछ जवानों ने गरीब-भूखे-प्रवासी मजदूरों की मदद कर लोगों की तारीफ हासिल की थी. वहीं तालाबंदी के दौरान पुलिस के जवान अपनी जान की परवाह किए बिना दिन-रात ड्यूटी पर तैनात रहे. लेकिन जैसे ही अनलॉक-1 और 2 की प्रक्रिया शुरू हुई पुलिस का व्यवहार ही बदल गया. कुछ लोग मान रहे हैं कि गुजरात पुलिस सिंघम फोबिया से पीड़ित है. वहीं बड़ी संख्या में लोग मान रहे हैं कि गुजरात पुलिस के जवानों को सिंघम बनाने में जल्दबाजी की जा रही है.

गुजरात पुलिस सबसे पहले सुर्खियों में उस वक्त आई जब वडोदरा की एक महिला कांस्टेबल मंत्री के बेटे को कानून का पाठ पढ़ाते हुए नजर आई. इस महिला कांस्टेबल का ओडियो- वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुए जिसके बाद लोग बेतहाशा उसकी तारीफ का पुल बांधने लगे. लेकिन एक आम आदमी पुलिस के जिस कार्यशैली से परेशान होता है उसके बारे में किसी का ध्यान ही नहीं गया. वडोदरा महिला कांस्टेबल की तारीफ में लोग तालियां बजा रहे हैं. लेकिन वीडियों ने पुलिस कल्चर को बेनकाब कर दिया.

महिला कांस्टेबल सुनीता यादव की आवाज में गुस्सा, उसके बात करने का तरीका, डंडे का जोर और खाकी वर्दी का घमंड भी इस वीडियों में दिखाई दे रहा है. लेकिन लेडी सिंघम का तमंगा देने की जल्दबाजी में लोगों ने इस तरफ ध्यान ही नहीं दिया.

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अब दूसरे मामले की बात करते हैं अहमदाबाद के जमालपुर इलाके में पुलिस ने जुनैद पठान को सिर्फ इसलिए बुरी तरीके से घायल कर दिया कि वह बिना मास्क घर से निकला था. पुलिस की बेरहमी की वजह से आज वह सिविल अस्पताल में इलाज करा रहा है. ऐसे में सवाल ये उठता है कि जब राज्य सरकार ने पुलिस को सत्ता दे दी है कि बिना मास्क के घर से निकलने वाले लोगों से जुर्माना वसूल सकती है. तो फिर पुलिस लोगों के साथ मारपीट क्यों कर रही है?

इस मामले के बिल्कुल एक दिन बाद पुलिस की ज्यादती का शिकार दो अन्य नौजवान हुए अहमदाबाद के खाड़िया इलाके में रहने वाले दो नौजवान बिना मास्क घर दवा लेने निकले थे इसी दौरान पुलिस ने इन्हे रोक लिया. पुलिस की ज्यादती का शिकार होने वाले अनीस अर्जुन इस सिलसिले में जानकारी देते हुए कहते हैं कि-“जब मैं अपने पिता की दवा लेने के लिए अपने दोस्त के साथ मेडिकल स्टोर की ओर जा रहा था. इसी दौरान पुलिस की टीम ने हमें रोक लिया रायपुर दरवाजा के ठीक बाहर बेरहमी से पीटना शुरू कर दिया. इस दौरान मौके पर मौजूद पुलिस सब इंस्पेक्टर ने कहा कि इन लोगों को अंदर लेकर जाकर जमकर पिटाई करो. इन दोनों को पुलिस ने गुप्तांग पर भी मारा. मारपीट में घायल हुए दोनों को वीएस अस्पताल में भर्ती कराया गया लेकिन उचित इलाज नहीं मिलने की वजह से एलजी अस्पताल में शिफ्ट किया गया.

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मास्क नहीं पहनने का जुर्माना मासूम बच्चे की कोख में मौत

एक और नया मामला सामने आया है जिसे देखकर लगता है कि गुजरात पुलिस वाकई में सिंघम मानसिकता से पीड़ित हो गई है. गुजरात के बनासकांठा से जहां पुलिस ने सिर्फ इसलिए एक परिवार को रोक लिया कि इन लोगों ने मास्क नहीं पहना था. लेकिन परिवार ने मास्क क्यों नहीं पहना था इसे जानने की भी पुलिस ने कोशिश भी नहीं की और सभी को पुलिस स्टेशन उठा ले गए. दरअसल ये परिवार बिना मास्क घर से इसलिए निकला था क्योंकि इनके घर में मौजूद एक गर्भवती महिला को लेबर पेन हो रहा था. पुलिस स्टेशन में महिला पुलिस के सामने कराहती और आजीजी करती रही लेकिन वहां मौजूद पुलिसकर्मी तथाकथित सिंघम पुलिसिया रुआब से बाहर नहीं निकले. लेकिन मामला खराब होता देखा तो परिवार को अस्पताल जाने की अनुमित दे दी गई. परिवार अस्पताल पहुंचा और महिला का ऑपरेशन से बच्चा हुआ लेकिन शायद देर हो चुकी थी. बच्चा दुनिया में आने से पहले ही दुनिया को अलविदा कह चुका था. जिसके बाद परिजन पुलिस स्टेशन पहुंचकर इंसाफ की मांग कर हंगामा किया मामला सामने आने के बाद पुलिस अधीक्षक ने इस पूरे मामले की जांच का आदेश दिया है.

गुजरात में होने वाली ये 4 घटनाएं पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़ा कर रहे हैं. लेकिन सबसे बड़ा सवाल की गुजरात पुलिस जिस सिंघम मानसिकता से पीड़ित क्या उसका सपोर्ट करना चाहिए अगर हां तो फिर पुलिस की यह कार्यशैली जल्द ही हमें और आपको अपना शिकार बना लेगी और अगर नहीं तो पुलिस कल्चर के इस अंदाज का विरोध होना चाहिए.

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