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जामनगर के बांगा गांव में किसानों ने मूंगफली की फसल को लगा दी आग

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कालावड़: जामनगर के कालवाड़ तहसील के बांगा गांव में किसानों ने खराब हुई मूंगफली की फसल में आग लगा दी. Gujrat farmer

इस साल गुजरात होने वाली भारी बारिश की वजह से मूंगफली की फसल बर्बाद हो गई है. मिल रही जानकारी के अनुसार किसानों ने खराब फसल की वजह से यह कदम उठाया.

बर्बाद हुई मूंगफली की फसल से परेशान किसान सरकार से मदद की मांग कर रहे हैं.

कांग्रेस ने मूंगफली की खरीद में अनियमितता का लगाया था आरोप Gujrat farmer

कुछ दिन पहले गुजरात कांग्रेस ने आरोप लगाया था कि जामनगर में कालावड मार्केट यार्ड में समर्थन मूल्य पर मूंगफली की खरीद में अनियमितताएं हो रही थीं.

कांग्रेस ने आरोप लगाया था कि सरकार की रियायतों के बावजूद, नाफेड के कर्मचारी और मजदूर किसानों से पैसा इकट्ठा कर रहे है. Gujrat farmer

यह रुपया किस लिए इकठ्ठा किया जा रहा है इस बारे में कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया जा रहा है. इसके अलावा सरकार के अनुमति के बावजूद 25 किलो की बोरी लेने से इनकार कर रहे हैं.

दरअसल सरकार ने किसानों को 25 किलो की बोरी मार्केट में लाने की अनुमति दी थी. लेकिन नाफेड के कर्मचारी किसानों पर अपनी मनमर्जी चलाते हैं और 25 किलो की बोरी में भरे मूंगफली को लेने से इनकार कर रहे हैं.

समर्थन मूल्य से कम भाव पाने पर इडर के किसानों ने किया था चक्काजाम Gujrat farmer

साबरकांठा के इडर तहसील के किसानों ने आरोप लगाया था कि मूंगफली की कीमत समर्थन मूल्य से कम दी जा रही है.

किसानों ने सापवाडा गांव में इडर-हिम्मतनगर हाईवे पर अपनी मांग को लेकर चक्काजाम किया था. किसानों ने रास्ता रोकर विरोध प्रदर्शन किया था.

किसानों ने इस मौके पर दावा किया कि सरकार द्वारा घोषित समर्थन मूल्य से नीचे मूंगफली का दाम दिया जा रहा है.

केंद्र सरकार लागू कर चुकी है कृषि कानून Gujrat farmer

मालूम हो कि राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने 27 सितंबर को तीनों कृषि विधेयकों को मंजूरी दी थी. उसको लेकर लगातार विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं.Gujrat farmer

खासतौर से पंजाब और हरियाणा के किसान विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. गजट अधिसूचना के अनुसार राष्ट्रपति ने तीन विधेयकों को मंजूरी दी थी.

नए कृषि कानूनों में मंडी से बाहर फसल बिक्री की खुली छूट, प्राइवेट फार्मिंग को बढ़ावा देने जैसे प्रस्ताव लाए गए हैं.

हालांकि, कई कृषि संगठन और राजनीतिक दल इन कानूनों को किसान विरोधी करार दे रहे हैं. साथ ही किसानों की ओर से डर जताया गया है कि इस कानून से एमएसपी सिस्टम खत्म हो जाएगा.

हालांकि सरकार का कहना है कि ये गलत है, एमएसपी सिस्टम जारी रहेगा.

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