Gujarat Exclusive > देश-विदेश > हाथरस मामले की जांच करने वाली SIT को मिला 10 दिन का अतिरिक्त समय

हाथरस मामले की जांच करने वाली SIT को मिला 10 दिन का अतिरिक्त समय

0
159
  • CM योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर SIT को मिला 10 दिन का और समय
  • स्पेशल इन्वेस्टीगेशन टीम को आज पेश करनी थी जांच रिपोर्ट
  • स्पेशल इन्वेस्टीगेशन टीम मामले को लेकर 100 से ज्यादा लोगों से कर चुकी है पूछताछ

उत्तर प्रदेश के हाथरस के चंपदा इलाके में रहने वाली 19 वर्षीय दलित लड़की के साथ कथित गैंगरेप के मामले की जांच कर रही स्पेशल इन्वेस्टीगेशन टीम को राज्य सरकार ने 10 दिनों का अतिरिक्त समय दिया गया है.

एसआईटी को आज अपनी रिपोर्ट पेश करनी थी. इससे पहले सीएम योगी आदित्यनाथ ने मामले की रिपोर्ट सात दिन के भीतर सौंपने का निर्देश जारी किया था.

सीएम योगी के निर्देश पर मिला वक्त

उत्तर प्रदेश के अपर मुख्य सचिव गृह अवनीश अवस्थी ने इसकी पुष्टि की है. उन्होंने इस सिलसिले में जानकारी देते हुए कहा कि सीएम योगी आदित्यनाथ के निर्देश के बाद स्पेशल इन्वेस्टीगेशन टीम को अपनी रिपोर्ट देने का समय 10 दिन बढ़ा दिया गया है.

यह भी पढ़ें: हाथरस गैंगरेप के बहाने दंगा भड़काने की कोशिश, PFI एजेंट समेत 4 गिरफ्तार

100 से ज्यादा लोगों से एसआईटी की टीम कर चुकी है पूछताछ

सचिव गृह भगवान स्वरूप की अध्यक्षता में बनाई गई एसआईटी की टीम में भगवान स्वरूप के अलावा एसआईटी में डीआईजी चंद्र प्रकाश द्वितीय और एसपी पूनम को बतौर सदस्य शामिल किया गया हैं.

स्पेशल इन्वेस्टीगेशन टीम इस मामले में 100 से ज्यादा लोगों से पूछताछ कर चुकी है. जिसमें आरोपी और पीड़ित परिवार के साथ ही साथ पुलिस प्रशासन के कई अधिकारियों का नाम शामिल है.

गौरतलब है कि राज्य सरकार कल सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर दावा कर चुकी है कि पीड़िता के साथ गैंगरेप हुआ ही नहीं थी.

लेकिन पीड़ित परिवार जोर देकर कह रहा है कि पहले पीड़िता के साथ गैंगरेप किया गया था उसके बाद उसकी बेरहमी से पिटाई की गई थी.

इस मामले को लेकर अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज में फोरेंसिक मेडिसिन विभाग ने प्रमाणित किया है कि हाथरस मामले में 19 साल की दलित पीड़िता के साथ रेप का कोई सबूत नहीं मिला है.

गुजराती में ताजा खबरें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

UP सरकार का SC में हलफनामा, रात में नहीं होता अंतिम संस्कार तो भड़क जाती हिंसा