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हेलमेट मामला: हाईकोर्ट में रुपाणी सरकार का यू-टर्न, अपने ही मंत्री को साबित किया झूठा

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अहमदाबाद: गुजरात सरकार ने हेलमेट पहने के मामले को लेकर एक बार से फिर यू-टर्न लिया है. गुजरात सरकार ने गुजरात हाई कोर्ट हलफनाम दाखिल कर कहा कि हेलमेट से आजादी को लेकर सरकार की ओर कोई परिपत्र जारी नहीं किया गया है. इसलिए हेलमेट पहनने से दी गई छूट का कोई सवाल ही नहीं उठता, हाईकोर्ट में दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान गुजरात कहा कि हेलमेट से आजादी कभी नहीं दी गई थी. इतना ही नहीं सरकार ने अपने हलफनामे में कहा कि दोपहिया वाहन चालक के अलावा पीछे बैठने वाले सहयात्री को भी हेलमेट पहनना अनिवार्य होगा.

हाईकोर्ट राज्य सरकार ने पेश किया हलफनामा

परिवहन आयुक्त ने गुजरात उच्च न्यायालय में जवाब पेश करते हुए कहा कि अब से दोपहिया वाहन चालकों को हेलमेट पहनना अनिवार्य है. राज्य सरकार केंद्र के नियमों का पालन कर रही है. हाईकोर्ट ने परिवहन मंत्री आरसी फाणदू के उस घोषणा को भी रद्द कर दिया. उच्च न्यायालय ने कहा कि हेलमेट पहने को लेकर छूट वाला कोई परिपत्र नहीं किया गया था, इसलिए आवेदक की जनहित याचिका को रद्द किया जाना चाहिए. गुजरात सरकार नये मोटर व्हीकल एक्ट को लागू किया था जिसके बाद व्यापक विरोध को मद्देनजर हेलमेट पहनने से आजादी दी थी.

राज्य सरकार ने अदालत में हलफनामा पेश कर कहा कि हेलमेट अनिवार्य है. वहीं दूसरी ओर परिवहन मंत्री ने मौखिक ऐलान किया था कि कि हेलमेट पहनना अनिवार्य नहीं है. ऐसे में सरकार के बदले इस रवैये से दुपहिया वाहन चालकों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं. गैरतलब हो कि गुजरात के परिवहन मंत्री आरसी फाणदू ने 4 दिसंबर को कहा था कि राज्य सरकार ने देखा है कि शहरी क्षेत्रों में वाहनों की गति अपेक्षाकृत कम होती है और सड़कों पर स्पीडब्रेकर भी काफी होते हैं. इतना ही नहीं शहरी क्षेत्रों में यात्रा करने वाले लोगों कुछ दूरी का सफर करते हैं इसलिए शहरी इलाकों में हेलमेट पहनना मन चाहा बना दिया गया था.