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“वरदान मैं माँगूँगा नहीं”: AMC के पूर्व कमिश्नर नेहरा ने सरपरस्ती से किया इनकार

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अहमदाबाद म्युनिसिपल कार्पोरेशन के पूर्व कमिश्नर विजय नेहरा ने आज एक ट्वीट करते हुए लेखक शिवमंगल सिंह “सुमन” की कुछ पंक्तियां शेयर की. नेहरा ने सुमन की कविता “वरदान मैं मॉंगूंगा नहीं” को डबल इनवर्टेड कॉमा में कोट करते हुए कविता का स्क्रीन शॉट शेयर किया. मौजूदा हालात और गुजरात नौकरशाही में चल रही उठा पठक के बीच नेहरा का यह कविता शेयर करना इस बात की तरफ साफ इशारा कर रहा है कि नेहरा ने आज गुजरात मुखिया विजय रुपाणी से मुलाकात के दौरान समर्पण करना और सरपरस्ती स्वीकार करने से इनकार कर दिया है.

उल्लेखनीय है कि अहमदाबाद के पूर्व मनपा कमिश्नर विजय नेहरा को त्वरीत स्तर पर कार्रवाई करते हुए मनपा कमिश्नर के पद से हटाकर ग्रामीण विकास में तबादला कर दिया गया है. नेहरा को मनपा से हटाने से पहले कोरोना संक्रमित के संपर्क में आए होने का कारण देकर 14 दिनों के लिए सिस्टम से बाहर (एकांतवास ) कर दिया गया था. आनफानन में कार्यकारी कमिश्नर के रुप में मुकेश कुमार को नियुक्त कर दिया गया वहीं दिल्ली सरकार के विशेष दूत के रुप में (आधिकारिक रुप से गुजरात सरकार के अधिकारी ) वन और पर्यावरण विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. राजीव गुप्ता को भी अहमदाबाद के मैदान में उतार दिया गया.

नेहरा ने थोड़े ही दिनों में अपने स्वास्थ्य की जानकारी देते हुए एक ट्वीट किया कि “वह स्वस्थ्य हैं”. किंतु मौजूदा नेतृत्व ने नेहरा के ट्वीट द्वारा किए गए दबाव को नजरअंदाज करते हुए कार्यकारी कमिश्नर मुकेश कुमार को पूर्ण रूप से अहमदाबाद मनपा का कमिश्नर नियुक्त कर दिया और नेहरा को ग्रामीण विकास में कमिश्नर के रुप में तबादला कर दिया गया.

2001 बैच के आईएस अधिकारी विजय नेहरा गुजरात के मौजूदा मुख्यमंत्री विजय रुपाणी और उनके घरेलू किचन कैबिनेट के सदस्य माने जाते हैं. जिस वजह से मनपा कमिश्नर के रुप में पूर्ण शक्ति उनको हासिल थी. मौके- बेमौके पर मन मानिया करते रहने का आरोप उन पर जन प्रतिनिधियों के द्वारा लगता रहा है. परंतु नेहरा का कभी बाल भी बांका नहीं हुआ. इतना ही नहीं. मोदी सरकार के मेगा इवेंट ” नमस्ते ट्रंप” का सफलतापूर्वक भव्य आयोजन करके नेहरा ने केंद्र सरकार में भी अपनी पैठ बनानी शुरू कर दी थी परंतु कोरोना महामारी ने अहमदाबाद में जब तबाही मचाना शुरु किया तो नेहरा की केंद्रीय नेतृत्व के सामने खड़ी की गई छवि बिखर गई और उन्हें गुड बुक से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया.

नेहरा ने कोरोना से लड़ने का जो रास्ता अख्तियार किया था वह केंद्रीय नेतृत्व को रास नहीं आ रहा था. नेहरा के द्वारा दिन ब दिन जारी हो रहे स्टेटमेंट और प्रेस रिलीज “गुजरात मॉडल” की धज्जियां बिखेर रहे थे. नेहरा के द्वारा कोरोना को लेकर पेश किए जा रहे अन आधिकारिक आकड़े और व्यक्तिगत ब्रांड मैनेजमेंट को भी केंद्रीय नेतृत्व को स्वीकार नहीं कर पा रही थी. जिसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भरोसेमंद अधिकारी राजीव गुप्ता को अहमदाबाद के हालात को संभालने के लिए मैदान में उतारा गया.

उल्लेखनीय है कि, विजय नेहरा ग्रामीण विकास आयुक्त के रुप में जिम्मेदारी संभालने के साथ मुख्यमंत्री विजय रुपाणी से आज मिलने गए थे. जिसके बाद उन्होंने सुमन की कविता “वरदान मैं मॉंगूंगा नहीं” अपने ट्वीटर एंव फेसबुक पेज पर शेयर किया. मुख्यमंत्री कार्यालय से संपर्क रखने वाले एक अन्य अधिकारी ने बताया कि मुख्यमंत्री रुपाणी चाहते थे कि नेहरा केंद्र सरकार के नेतृत्व में चलने में वाली गुजरात की पावरलॉबी से समझौता करते हुए उनकी सरपरस्ती स्वीकार कर लें. परंतु अभी तो हाल फिलहाल नेहरा ने “वरदान” नहीं मांगने का रास्ता अख्तियार किया है.

 

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