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गलवान घाटी से पीछे हटेंगे चीनी सैनिक, दोनों देशों में बनी सहमति

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पूर्वी लद्दाख में भारत-चीन सीमा पर पिछले कुछ समय से दोनों देशों सैनिकों के बीच तनाव की स्थिति बनी हुई है लेकिन अब खबर है कि दोनों सेनाएं इस तनाव को खत्म करने के लिए तैयार हो गई हैं. सेना ने बयान जारी करके कहा है कि पूर्वी लद्दाख में दोनों देशों के सैनिक पीछे हटेंगे. मालूम हो कि मंगलवार को कमांडर स्तर पर करीब 11 घंटे तक बातचीत हुई थी और समझा जा रहा है कि उसी बातचीत के दौरान दोनों देशों के बीच पीछे हटने पर रजामंदी हुई.

मंगलवार को सेना की ओर से कहा गया है कि सोमवार को दोनों देशों की ओर से गलवान घाटी में हुई झड़प और संघर्ष के दूसरे मुद्दों के लेकर लेफ्टिनेंट कमांडर स्तर पर बातचीत हुई, जिसमें दोनों देश ‘सेना की वापसी के लिए आपसी सहमति’ जताई. सेना ने कहा कि ये बातचीत बहुत ही सकारात्मक और बेहतर माहौल में हुई.

भारत और चीन के सैन्य कमांडर्स‌ के बीच सोमवार को करीब 11 घंटे लंबी मैराथन बैठक चली. दोनों देशों के कोर कमांडर्स के बीच ये दूसरी बड़ी बैठक थी. पहली बैठक 6 जून के हुई थी. ये मीटिंग इसलिए महत्वपूर्ण हो जाती है क्योंकि गलवान घाटी में हुए हिंसक संघर्ष के बाद हो रही थी. मीटिंग में भारत ने लद्दाख से सटी एलएसी पर स्टेट्स क्यों यानि मई महीने के शुरूआत वाली परिस्थितियों पर जाने पर जोर दिया. अब चीन की सेना पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी से पीछे हटेगी.

इस बीच सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे लद्दाख पहुंच गए हैं. वह यहां चीनी सेना के साथ चल रहे छह हफ्ते के गतिरोध पर तैनात कमांडरों के साथ चर्चा करेंगे. सैन्य सूत्रों ने बताया कि सैन्य प्रमुख अग्रिम इलाकों का दौरा करेंगे और वहां तैनात सैनिकों के साथ बातचीत करेंगे. जनरल नरवणे का यह दौरा गलवान घाटी में चीनी सैनिकों के साथ संघर्ष में 20 भारतीय सैनिकों के शहीद होने और सीमा पर तनाव बढ़ने के एक हफ्ते बाद हो रहा है. मालूम हो कि इस झड़प में चीन के भी कई सैनिकों के मारे जाने की खबर आई थी. हालांकि आधिकारिक स्तर पर उसने अभी तक इसको नहीं स्वीकार किया है.

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