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भारत-चीन के विदेश मंत्रियों के बीच होगी बैठक, सीमा विवाद पर चर्चा की उम्मीद

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  • चीन और भारत के विदेश मंत्रियों के बीच आज हो सकती है बैठक
  • बैठक में सीमा विवाद पर चर्चा की उम्मीद
  • कहा एलएसी पर हालात बेहद नाजुक
  • रूस रवाना होने से पहले विदेश मंत्री का बड़ा बयान
  • इससे पहले चीन दे चुका है धमकी हम अपनी क्षेत्र की रक्षा के लिए तैयार

गलवान घाटी में होने वाली हिंसक झड़प के बाद से ही चीन और भारत के रिश्तों में तनाव आ गया है.

इस बीच जानकारी मिल रही है कि शंघाई सहयोग संगठन में हिस्सा में लेने के लिए मॉस्को पहुंच भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर और उनके चीनी समकक्ष वांग यी के बीच आज बैठक हो सकती है.

यह बैठक इसलिए भी काफी अहम मानी जा रही है क्योंकि बीते कुछ सीमा पर ऐसा हुआ था कि 45 सालों बाद सीमा पर फायरिंग की गई थी.

हिंसक हमले बाद पहली बार होगा आमना-सामना

मिल रही जानकारी के अनुसार आज सुबह शंघाई में होने वाली विदेश मंत्रियों की बैठक में भी विदेश मंत्री एस जयशंकर और चीनी विदेश मंत्री वांग यी का आमना-सामना होगा.

आज होने वाली बैठक में ऐसे मौके आने वाले हैं जब दोनों देश के विदेश मंत्री आमने-सामने आने वाले हैं. लद्दाख में LAC पर जून में शुरू हुई गतिरोध के बाद जयशंकर और वांग की यह पहली मुलाकात होगी.

रूस रवाना होने से पहले विदेश मंत्री का बड़ा बयान

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने इंडियन एक्प्रेस के एक्सप्रेस अड्डा संवाद सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि एलएसी पर मौजूदा हालात बेहद गंभीर हैं.

ऐसे हालात में दोनों पक्षों को राजनीतिक स्तर पर बेहद गंभीर और गहन विचार-विमर्श की है, जयशंकर ने कहा, द्विपक्षीय वार्ता में सरहद के हालात से अलग हटकर दोनों देशों के बीच रिश्तों को नहीं देखा जा सकता है.

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जब उनसे पूछा गया कि वह अपने चीनी समकक्ष को क्या संदेश देंगे तो जयशंकर ने कहा, कि मैं वास्तव में जो कहूंगा उसे तो नहीं बता सकता लेकिन इतना जरूर है कि वह चीन पर पैदा होने वाले हालात को लेकर जरुर उनसे बातचीत करेंगे.

इससे पहले रक्षा मंत्री भी कर चुके है चीनी रक्षा मंत्री से मुलाकात

इससे पहले मॉस्को में चीन के रक्षा मंत्री वेई फेंगही ने भारतीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात करने के बाद एक बयान जारी कर भारत पर बड़ा आरोप लगाया था.

करीब दो घंटों तक चले इस बैठक में चीन ने तनाव बढ़ाने के लिए भारत को जिम्मेदार ठहराया.

इतना ही नहीं चीन ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि चीन अपनी एक इंच जमीन नहीं छोड़ सकता.

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