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क्या नागरिकता संशोधन कानून का विरोध करना अपराध है? महिला को छोड़ना पड़ा घर

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क्या नागरिकता संशोधन कानून का विरोध करना गुनाह है, क्या आप आजाद भारत में रह रहे हैं? ये सवाल इस लिए उठ रहा है क्योंकि अगर आप इस कानून का विरोध करते हैं तो आपकी जान भी जा सकती है और आपको घर से निकालकर बाहर भी कर दिया जा सकता है भले ही वह कोई महिला ही क्यों ने हो. ऐसे में केन्द्र के उस दावे पर भी सवाल खड़ा होता है बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ. दरअसल मामला है दिल्ली का जहां पर केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह की जनसंपर्क रैली के दौरान बालकनी से कानून का विरोध करने वाली दो महिलाओं ने कहा है कि उनसे घर खाली करा लिया गया है.

दिल्ली के लाजपत नगर के घर की छत से बैनर पर बीच में बड़े अक्षरों में शेम (शर्म) और दोनों तरफ सीएए और एनआरसी लिखा हुआ था. इसके अलावा उसपर जय हिन्द, आजादी और ”नॉट इन माई नेम” भी लिखा था. इस सिलसिले में जानकारी देते हुए सूर्या ने कहा, ”सीएए और एनआरसी को लेकर शांतिपूर्ण विरोध को दर्ज कराने के लिए और यह दिखाने के लिये कि सरकार की परेड देख रहे सभी लोग सीएए और एनआरसी के समर्थन में नहीं हैं, फ्लैट की मेरी साथी और मैंने अपने अपार्टमेंट की बालकनी से उस समय बैनर प्रदर्शित किया, जब अमित शाह के नेतृत्व में रैली हमारी गली से गुजर रही थी.’’

सूर्या ने आरोप लगाया कि इस विरोध को देखकर, रैली में शामिल लोग गुस्सा हो गए और अपशब्द कहे. सूर्या ने कहा कि उनके अपार्टमेंट के नीचे सड़क पर लगभग 150 लोगों की भीड़ जमा थी, जिन्होंने बालकनी से लटकाए गए विरोध बैनर को फाड़ दिया गया और अपने साथ ले गए. सूर्या ने कहा कि एक समूह भीड़ से अलग हो गया, जो नीचे की तरफ इकट्ठा हो गया और सीढ़ियों से ऊपर चढ़ने की कोशिश करने लगा. साथ ही धमकी दी कि अगर उन्हें ऊपर नहीं आने दिया गया तो दरवाजा तोड़ दिया जाएगा.

जिसके बाद हमने खुद को घर में बंद कर लिया, फिर भी पुलिस के हस्तक्षेप करने तक वे हिंसक रूप से हमारा दरवाजे पीटते रहे और चिल्लाते रहे. उन्होंने कहा, ”इस बीच, हमारे मकान मालिक ने बताया कि हमें मकान से निकाल दिया गया है. काफी देर बाद और कई बार हस्तक्षेप करने के बाद मेरे दोस्तों और पिता को एक पुलिस अधिकारी के साथ परिसर में प्रवेश करने की अनुमति दी गई.