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झारखंड इलेक्शन बीजेपी को न ‘राम’ का मिला साथ न ‘राष्ट्रवाद’ आया काम, हाथ से गया एक और राज्य

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झारखंड विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने जहां एक राष्ट्रीय मुद्दों को प्रमुखता से उठाया. वहीं दूसरी तरफ बीजेपी के नेताओं ने राम मंदिर और कश्मीर से धारा 370 जैसे संवेदनशील मामले को लेकर अपनी पीठ थपथपाते हुए नजर आई. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और अमित शाह ने अपने चुनावी भाषणों में राष्ट्रीय मुद्दों को जोर शोर से उठाया. बीजेपी को उम्मीद थी कि कश्मीर से धारा 370 हटाने और राम मंदिर जैसे बड़े मुद्दों का उसे विधानसभा चुनाव में फायदा होगा लेकिन जनता ने इन मुद्दों को सिरे से नकार दिया.

राम मंदिर फैसले के बाद पहला चुनावी नतीजा

राममंदिर मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 9 नवंबर को अपना फैला सुनाया था. सुप्रीम कोर्ट का फैसला हिंदुओं के पक्ष में आने के बाद से ही बीजेपी इसे अपनी जीत बता रही थी. झारखंड चुनाव में भी बीजेपी ने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया. गृहमंत्री अमित शाह के साथ ही साथ पार्टी के कई आला नेता चुनाव प्रचार में राम मंदिर का जिक्र करते हुए राम मंदिर निर्माण की तारीख तक बता दी. अमित शाह ने चुनाव प्रचार के दौरान कहा कि अयोध्या में अगले चार महीने में आसमान छूता राममंदिर दिखाई देगा, वहीं कांग्रेस पर बड़ा हमला भी बोला और राम मंदिर को लेकर सुप्रीम कोर्ट कोई फैसला ना सुना सके इसके लिए कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराया.

धारा 370 भी नहीं आई काम

अगस्त में बीजेपी ने कश्मीर से धारा 370 और आर्टिकल 15ए खत्म कर कश्मीर को दो हिस्सों में बांट दिया था. देशभर में बीजेपी के निर्णय को समर्थन मिला था. बीजेपी का मानना था कि इस मुद्दे पर उसे चुनाव में जनता का भरपूर समर्थन मिलेगा. लेकिन ऐसा नहीं हो सका. जनता ने इस मुद्दे को सिरे से नकारते हुए स्थानीय मुद्दों को ही प्रमुखता दी.

तीन तलाक को लेकर कानून

तीन तलाक को लेकर भी झारखंड के चुनावी सभा में इसकी भी गूंज सुनाई दी जहां एक तरफ पूरे देश में सीएए को लेकर विरोध प्रदर्शन हो रहा है और कई प्रदर्शनकारियों की मौत हो चुकी थी उसी दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कांग्रेस को चुनौती दे रहे थे कि जिस कानून को हमने बनाया है अगर कांग्रेस में हिम्मत हो तो उसे हटाकर दिखाए.