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लक्ष्मी विलास बैंक के डीबीएस बैंक में विलय को मिली मंजूरी, कैबिनेट ने लगाई मुहर

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वित्तिय संकट से गुजर रहे लक्ष्मी विलास बैंक (Lakshmi Vilas Bank) को लेकर आज केन्द्रीय कैबिनेट ने एक बड़ा फैसला लिया है. ऋण संकट से जूझ रहे लक्ष्मी विलास बैंक (Lakshmi Vilas Bank) को डेवलपमेंट बैंक इंडिया लिमिटेड (डीबीआईएल) के साथ विलय को कैबिनेट की ओर से मंजूरी दे दी गई है.

केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने बुधवार को बताया कि अब जमाकर्ताओं पर बैंक से अपने पैसे निकालने पर किसी तरह की रोक नहीं होगी.

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जावड़ेकर ने कहा कि सरकार ने रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया से कहा है कि वे मैनेजमेंट के उन लोगों के खिलाफ कार्रवाई करें जिसके चलते बैंक डूबने के कगार पर पहुंचा. उन्‍होंने बताया कि लक्ष्‍मी विलास बैंक (Lakshmi Vilas Bank) के डीबीएस बैंक इंडिया लिमिटेड के साथ विलय से लक्ष्‍मी विलास बैंक के करीब 20 लाख जमाकर्ताओं और लगभग चार हजार कर्मचारियों को राहत मिलेगी.

जावडेकर ने बताया कि कैबिनेट ने नेशनल इनवेस्‍टमेंट एंड इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर फंड में 6000 करोड़ रुपये के निवेश को मंजूरी इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर डेवलपमेंट के लिए दी है. इसके साथ की कैबिनेट ने M/s. ATC टेलीकॉम इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर प्राइवेट लिमिटेड में M/s. एटीसी एशिश पैसेफिक प्राइवे लि‍मिटेड की ओर से 2480.92 करोड़ रुपये के विदेशी निवेश को भी हरी झंडी दे दी है.

16 दिसंबर तक लगी थीं पाबंदियां

मालूम हो कि लक्ष्मी विलास बैंक (Lakshmi Vilas Bank) को सरकार ने मोरेटोरियम में डालते हुए 25 हजार रुपये की निकासी तय करने समेत उस पर 16 दिसंबर तक के लिए कई तरह की पाबंदिया लगा दी थी. रिजर्व बैंक ने लगातार वित्तीय गिरावट को देखते हुए लक्ष्मी विलास बैंक (Lakshmi Vilas Bank) का नियंत्रण अपने हाथों में ले लिया था. बैंक के बढ़ते एनपीए और इसे चलाने में आ रही कठिनाइयों के बीच केन्द्र सरकार ने सिंगापुर की सबसे बड़े ऋणदाता डीबीएस बैंक के लोकल यूनिट डीबीएस बैंक इंडिया लिमिटेड (डीबीआईएल) के साथ विलय करने को कहा था.

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