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लखनऊ हिंसा: इलाहाबाद HC का बड़ा फैसला, योगी सरकार को पोस्टर हटाने का दिया आदेश

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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने संशोधित नागरिकता कानून (CAA) का पिछले साल दिसंबर में विरोध करने के दौरान सार्वजनिक और निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वाले प्रदर्शनकारियों से क्षति की वसूली के लिये पोस्टर लगाने की राज्य सरकार की कार्रवाई को चुनौती देने वाली याचिका पर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है. कोर्ट ने कहा है कि दीवारों से हटाए जाएंगे सभी बैनर और पोस्टर.

रविवार को इस मामले की सुनवाई के दौरान बाद मुख्य न्यायाधीश गोविंद माथुर और न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा की खंडपीठ के समक्ष राज्य सरकार की ओर से पेश हुए महाधिवक्ता राघवेंद्र प्रताप सिंह ने दलील दी थी कि अदालत को इस तरह के मामले में जनहित याचिका की तरह हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए. उन्होंने कहा कि बाकायदा पड़ताल के बाद इन लोगों के नाम सामने आए तो कानून के मुताबिक पूरी प्रक्रिया अपनाते हुए उन्हें अदालत से भी नोटिस जारी किया गया. अदालत के नोटिस के बावजूद ये लोग उपस्थित नहीं हो रहे थे. ऐसे में सार्वजनिक रूप से इनके पोस्टर लगाने पड़े. इस पर कोर्ट ने जानना चाहा कि ऐसा कौन सा कानून है जिसके तहत ऐसे लोगों के पोस्टर सार्वजनिक तौर पर लगाए जा सकते हैं.

उल्लेखनीय है कि पुलिस ने नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ पिछले साल दिसंबर में किये गए विरोध प्रदर्शन के दौरान हिंसा में लिप्त आरोपियों की पहचान कर पूरे लखनऊ में उनके कई पोस्टर लगाए हैं. पुलिस ने करीब 50 लोगों की पहचान कथित उपद्रवियों के तौर पर की है और उन्हें नोटिस जारी किया. पोस्टर में जिन लोगों की तस्वीरें हैं उसमें कांग्रेस नेता सदफ जाफर और पूर्व आईपीएस अधिकारी एस आर दारापुरी भी शामिल हैं.

पुलिस द्वारा जारी पोस्टर में आरोपियों के नाम, फोटो और आवासीय पतों का उल्लेख है. इसके परिणाम स्वरूप नामजद लोग अपनी सुरक्षा को लेकर आशंकित हैं. पुलिस-प्रशासन द्वारा लगाए गए इन पोस्टरों में 53 आरोपितों के नाम शामिल हैं. इस मामले को लेकर पूर्व आईपीएस अधिकारी एसआर दारापुरी का कहना है कि ऐसा करके योगी सरकार ने उनकी जिंदगी को खतरे में डाल दिया है.

लखनऊ में लगे पोस्टर को लेकर पूर्व IPS दारापुरी ने कहा- खतरे में योगी सरकार ने डाल दी जिंदगी