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राजनीति से संन्यास ले सकती हूं, लेकिन भाजपा के साथ नहीं जाऊंगी: मायावती

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कुछ दिन पहले मायावती बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) सुप्रीमो मायावती (Mayawati)  ने भाजपा के साथ जाने वाले एक बयान के बाद अटकलबाजियों का बाजार गर्म हो गया था लेकिन अब मायावती (Mayawati)  ने उस मुद्दे पर एकबार फिर अपनी राय रखी है. उन्होंने कहा है कि राजनीति से संन्यास ले सकती हूं लेकिन भाजपा के साथ कभी नहीं जा सकती.

समाजवादी पार्टी (SP) के प्रत्‍याशियों को हराने के लिए बीजेपी (BJP) के पक्ष में वोटिंग से परहेज नहीं करने की बात कहने वाली बहुजन समाज पार्टी (BSP) की प्रमुख मायावती (Mayawati) ने अब ये बयान जारी किया है. बीएसपी प्रमुख ने कहा है कि बीजेपी के साथ कोई भी गठबंधन करने के बजाय वे राजनीति से संन्‍यास लेना पसंद करेंगी.

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बीएसपी सुप्रीमो ने मायावती में कहा,

किसी भी चुनाव में बीजेपी के साथ बसपा का कोई भी गठबंधन भविष्‍य में संभव नहीं है. बीएसपी एक सांप्रदायिक पार्टी के साथ चुनाव नहीं लड़ सकती. हमारी विचारधारा सर्वजन सर्वधर्म हिताय की है और यह बीजेपी की विचारधारा के विपरीत है. बीएसपी उनके साथ गठबंधन नहीं कर सकती जो सांप्रदायिक, जातिवादी और पूंजीवादी विचारधारा के हैं.

गौरतलब है कि मायावती (Mayawati)  ने पिछले सप्‍ताह कहा था कि विधान परिषद और राज्‍यसभा सहित भविष्‍य के चुनावों में समाजवादी पार्टी के प्रत्‍याशियों की जीत सुनिश्चित करने के लिए उनकी पार्टी बीजेपी या किसी अन्‍य पार्टी के प्रत्‍याशी को भी वोट करने के से भी परहेज नहीं करेगी. यूपी में विधानसभा की सात सीटों पर मंगलवार को होने वाले मतदान से एक दिन पहले BSP अध्‍यक्ष और पूर्व मुख्‍यमंत्री मायावती ने BJP के साथ ‘मिले होने’ के आरोपों पर सफाई दी.

समाजवादी पार्टी से बसपा मजबूत हुई

मायावती (Mayawati)  ने कहा कि बसपा ने विपरीत परिस्थितियों में जब कभी भाजपा से मिलकर सरकार बनाई तो भी कभी अपने स्‍वार्थ में विचारधारा के खिलाफ गलत कार्य नहीं किया. उन्‍होंने कहा कि समाजवादी पार्टी जब भी सत्‍ता में आई तो भाजपा मजबूत हुई है. उन्होंने कहा कि राज्य में भाजपा की मौजूदा सरकार सपा के कारण बनी है. उन्‍होंने याद दिलाया कि उप चुनाव में बसपा ने सात सीटों में दो पर मुस्लिम उम्‍मीदवार उतार कर उनको प्रतिनिधित्‍व दिया है.

बीएसपी सुप्रीमो मायावती ने कहा कि यूपी में अपने अकेले दम पर या भाजपा के साथ मिलकर जब भी हमने सरकार बनाई तो मुस्लिम समाज का कोई नुकसान नहीं होने दिया, भले ही अपनी सरकार क़ुर्बान कर दी. उन्‍होंने विस्तार में जाए बिना कहा कि 1995 में जब भाजपा के समर्थन से मेरी सरकार बनी तो मथुरा में भाजपा और आरएसएस के लोग नई परंपरा शुरू करना चाहते थे लेकिन मैंने उसे शुरू नहीं होने दिया और मेरी सरकार चली गई.

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