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श्रमिक ट्रेनों से घर जाने वाले प्रवासी मजदूरों की दास्तां, सीट तो मिल गई लेकिन खाली हाथ हो रही है वापसी

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डायमंड सिटी सूरत से प्रवासी मजदूरों के लिए 20 श्रमिक स्पेशल ट्रेन चलाई जाएगी. पश्चिम रेलवे के चीफ पैसेंजर ट्रैफिक मैनेजर ने मुख्य परिचालन प्रबंधक से कहा है कि सूरत से 20 रेक तैयार करके रखें. पहली ट्रेन ओडिशा के लिए शनिवार शाम चार बजे रवाना हो चुकी है. इसी ट्रेन में ओडिशा का रहने वाला सुशांत सीट हासिल करने में कामयाब हो चुका है लेकिन अफसोस है कि उसे खाली हाथ घर वापसी करना पड़ रहा है.

ओडिशा के गंजम जिले का रहने वाला सुशांत दलाई गुजरात के सूरत में काम करता है. लॉकडाउन के बीच सरकार द्वारा चलायी जा रहीं स्पेशल ट्रेन से अपने घर लौट रहा है लेकिन उसे मलाल है कि वह अपनी पांच साल की बेटी के लिए कोई गुड़िया, ना ही 6 साल के बेटे के लिए कोई खिलौना कार, ना बीवी के लिए ‘सूरत की साड़ी’ जैसी कुछ चीज नहीं ले सका.

सुशांत सूरत की एक पावरलूम यूनिट में काम करता है और प्रवासी मजदूरों के लिए चलायी जा रही स्पेशल ट्रेन में सीट पाने में कामयाब रहा. बता दें कि सरकार द्वारा प्रवासी मजदूरों, लॉकडाउन की वजह से फंसे तीर्थयात्रियों, पर्यटकों और छात्रों को घर पहुंचाने के लिए ये स्पेशल ट्रेन चलायी जा रही हैं.

सुशांत ने बताया कि उसे एक दोस्त से इस स्पेशल ट्रेन के बारे में पता चला था, जिसके बाद उसने सूरत म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन द्वारा चलाए जाने वाले ओडिया स्कूल में अपना रजिस्ट्रेशन कराया. बता दें कि शुक्रवार से ये विशेष ट्रेनें चलनी शुरू हुई हैं और दो ट्रेनें शनिवार को गुजरात से ओडिशा के लिए और दूसरी उत्तर प्रदेश के लिए रवाना हुई.

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