Gujarat Exclusive > देश-विदेश > तेलंगाना से रांची पहुंचे राज्य के प्रवासी मजदूर, हुआ फूलों से स्वागत

तेलंगाना से रांची पहुंचे राज्य के प्रवासी मजदूर, हुआ फूलों से स्वागत

0
2061

गृह मंत्रालय द्वारा राहत दिए जाने के बाद लॉकडाउन के कारण दूसरे प्रदेशों में फंसे प्रवासी मजदूरों को उनके राज्यों में पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया है. तेलंगाना के अलग-अलग शहरों में फंसे झारखंड के लगभग 1200 मजदूर आधी रात को विशेष ट्रेन से रांची पहुंचे. यहां से सैनिटाइज्ड बसों में इन मजदूरों को इनके गृह जिलों में पूरे एहतियात और जांच के साथ भेजा जा रहा है. तेलंगाना के लिंगमपल्ली से खुली ये ट्रेन जैसे ही रांची से सटे हटिया स्टेशन पहुंची, ट्रेन में बैठे मजदूर खुशी से झूठ उठे. कई मजदूरों की आंखों में आंसू आ गए.

मालूम हो कि लॉकडाउन के बाद ट्रेन सेवाएं ठप होने के बाद ये पहली ट्रेन है, जो झारखंड के मजदूरों को लेकर आई है. न्यूज एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक रात सवा ग्यारह बजे के करीब जैसे ही ट्रेन हटिया स्टेशन पर रुकी, मजदूरों की चेहरे की चमक में पिछले 40 दिनों की सारी मुश्किलें छिप गईं. रेलवे स्टेशन पर इन मजदूरों का मेहमानों की तरह स्वागत हुआ, राज्य सरकार के अधिकारियों ने इन्हें गुलाब के फूल दिए और इनके लिए खाने की व्यवस्था की.

रांची के डिप्टी कमिश्नर महिमापत राय ने हटिया स्टेशन पर पत्रकारों से कहा कि स्टेशन पर इनकी प्राथमिक जांच की गई, इसके बाद इन्हें बसों से भेजा जा रहा है, इनके जिले में भी इनकी जांच की जाएगी. इसके बाद इन्हें होम क्वेरेंटीन किया जाएगा, अगर किसी में भी कोई लक्षण दिखते हैं तो उन्हें अलग रखा जाएगा.

इससे पूर्व प्रवासी यात्रियों की व्यवस्था को देखने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन हटिया स्टेशन पहुंचे. उन्होंने स्टेशन में अधिकारियों से व्यवस्था का जायजा लिया. हेमंत सोरेन ने मजदूरों का स्वागत किया और कहा कि स्वागत है साथियों. तेलंगाना से अपने घर पहुंचे श्रमिक साथियों की उचित जांच, गुलाब का फूल, भोजन एवं सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों का पालन करते हुए स्वागत किया गया. उन्होंने इसको लेकर एक वीडियो भी साझा किया.

 

24 बोगियों की ये ट्रेन तेलंगाना के लिंगमपल्ली स्टेशन से 1200 मजदूरों को लेकर शुक्रवार सुबह 4.50 पर रवाना हुई थी. सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों का ख्याल रखते हुए 72 पैसेंजर की क्षमता वाले एक डिब्बे में 54 मजदूरों को ही बिठाया गया था. एक कूपे में 8 की जगह 6 लोगों के बैठने की इजाजत दी.