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भारत-चीन के बीच होने वाली सैन्य स्तर की बातचीत खत्म, 14 घंटे से ज्यादा चली बैठक

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पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में होने वाले हिंसक हमले के बाद से ही चीन और भारत के रिश्तों के बीच तनाव साफ दिखाई दे रहा है. चीन को उसी की भाषा में जवाब देने के लिए भारत सरकार ने कड़े फैसले लेते हुए चीन के कई ऐप्स पर प्रतिबंध लगा चुकी है. इतना ही नहीं कई राज्यों ने चीनी कंपनी के साथ होने वाले करार को रद्द कर चीन को बड़ा झटका दिया है. लेकिन दोनों देशे के बीच के रिश्ते को एक बार फिर से बहाल करने के लिए सैन्य स्तर पर होने वाली बातचीच लगातार जारी है.

कल भी भारत औऱ चीन के बीच सैन्य स्तर की बातचीत सुबह 11.30 बजे शुरू हुई थी जो 15 जुलाई रात लगभग 2 बजे खत्म हुई. 14 घंटों से ज्यादा चलने वाली ये बैठक लद्दाख के चुशुल में आयोजित की गई थी. इस बैठक में सीमा पर जारी तनाव को कम करने और दूसरे कई हिस्सों में मौजूद सैनिकों की संख्या को कम करने के मामले पर मंथन किया गया.

इससे पहले होने वाली सैन्य स्तर की बैठक में फैसला लिया गया था कि दोनों देशों की सेना एलएसी से पीछे हट जाए. क्योंकि लद्दाख की गलवान घाटी में होने वाले हिंसक हमले के बाद से ही लगातार दोनों देशों की सेना सीमा पर तैनात हो गई थी. जिसके बाद युद्ध जैसे हालात बन गए थे. लेकिन तीसरे चरण की होने वाली बातचीत में दोनों देशों ने फैसला लिया कि सीमा पर तनाव को दूर करने के लिए सैनिकों को पीछे हटा लिया जाए.

भारत में सीमा पर जारी तनाव को लेकर सियासत भी जमकर की गई. जिसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अचानक लेह का दौरा कर लोगों को अचंभित कर दिया. उससे पहले कांग्रेस लगातार मांग कर रही थी कि केंद्र की मोदी सरकार चीन के मामले को लेकर देश को गुमहार कर रही है. इतना ही नहीं कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष तो बाकायदा इस मामले को लेकर अभियान चला रहे थे और हर दिन सोशल मीडिया पर नए-नए सवाल उठाकर मोदी सरकार पर तंज कस रहे थे.

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