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सांसद सीआर पाटिल ने प्रवासी मजदूरों को घर भेजने की बात की, गुजरात प्रशासन बेखबर

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हितेश चावड़ा, सूरत: कोरोना महामारी का प्रकोप गुजरात सहित पूरे देश और दुनिया में देखने को मिल रहा हैं. देश में कोरोना के संक्रमण को रोकने के लिए 3 मई तक लॉकडाउन (तालाबंदी) की घोषणा की गई थी. देश में लॉकडाउन खुलने में अभी एक हफ्ते का समय है. ऐसे में राज्य में फंसे प्रवासी मजदूरों को उनके राज्यों में भेजने की बात चल रही है. भाजपा सांसद सीआर पाटिल ने एक वीडियो में कहा है कि सूरत में फंसे मजदूरों को अपने राज्य भेजने के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय से संपर्क किया गया था और इसको लेकर उसने राज्य सरकार को निर्देश दिए हैं. हालांकि, जब गुजरात एक्सक्लूसिव ने सीएमओ कार्यालय से संपर्क किया तो उनको इसकी जानकारी नहीं हैं.

नवसारी से सांसद सीआर पाटिल ने प्रवासी मजदूरो को उनके गृह राज्य जाने देने की मंजूरी देने का वीडियो प्रसारित किया था. सीआर पाटिल ने कहा, “सूरत शहर में काम करने के लिए विभिन्न राज्यों से लाखों लोग आते हैं. वह लॉकडाउन के कारण लंबे समय से सूरत में रह रहे हैं. वह अपने गृहनगर वापस जाना चाहते थे क्योंकि निकट भविष्य में किसी भी उद्योग के शुरू होने का कोई संकेत नहीं है. गृह मंत्री अमित शाह से चर्चा की गई थी और उन्होंने गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपानी और सूरत के कलेक्टर को निर्देश दिया कि जिनके पास खुद का वाहन हो, उनको जाने की मंजूरी दें. जो लोग लंबे समय से घर जाना चाहते हैं वे जा सकते हैं. यह एक अच्छी सुविधा है, सूरत शहर पर जो दबाव था, यह कम होगा, हमें यकीन है कि यह एक अच्छा माहौल बनाएगा.” इस मामले में गुजरात एक्सक्लूसिव ने सीआर पाटिल से संपर्क करने की कोशिश की लेकिन उनसे संपर्क हो नहीं सका.

पिछले 40 दिनों से फंसे हैं प्रवासी मजदूर

सूरत सहित गुजरात में अन्य राज्यों के प्रवासी मजदूर तालाबंदी के कारण फंसे हुए हैं. वे लॉकडाउन के कारण बाहर भी नहीं जा सकते हैं और वे परेशान हैं क्योंकि उनके पास पैसा और राशन दोनों हीं नहीं है. मजदूर एक समय के भोजन के लिए तरस गए हैं. दूसरी ओर, ऐसा लगता है कि मजदूरों को भाजपा सांसद सीआर पाटिल ने गुमराह किया है. मजदूरों के पास सीआर पाटिल ने घर जाने के लिए लिए फॉर्म भरे थे और बसों की व्यवस्था की गई थी. हालांकि, न तो गुजरात के मुख्यमंत्री और न ही सूरत की प्रशासनिक शाखा को इस बारे में कुछ मालूम हैं.

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