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‘नमस्ते ट्रंप’: नर्मदा के आदिवासियों को नहीं रहा PM मोदी पर भरोसा, अमेरिकी राष्ट्रपति से की मध्यस्थता की मांग

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विशाल मिस्त्री, नर्मदा: स्टैचू ओफ यूनिटी का जब से भूमिपूजन हुआ है तब से उस क्षेत्र के आदिवासी अपनी जमीन, स्थानिय लोगों को रोजगार में प्राथमिकता समेत कइ मुद्दे पर लड़ाई लड़ रहे हैं. लेकिन उनके सवालों का हल होता नहीं दिख रहा. जब भी प्रधानमंत्री, गुजरात राज्य के मुख्यमंत्री या कोई मंत्री का स्टैचू ऑफ यूनिटी का दौरा होता है उस दौरान आदिवासी समाज अपनी मांगो के लेकर अक्सर प्रदर्शन करते रहे है. अब आदिवासी प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री रूपाणी को दरकिनार करते हुए वो सीधे अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को लिखित रूप में अपनी समस्याओं के बारे में भारत और गुजरात सरकार के बीच मध्यस्थता करने की मांग की है.

इंडीजिनस आर्मी ओफ इंडिया के संस्थापक और लंबे अरसे से स्टैचू ओफ यूनिटी और सरदार सरोवर नर्मदा डेम शरणार्थीयों के साथ लड़ाई लड़ रहे डो. प्रफुल्ल वसावा, डो.शांतिकर वसावा, लखन मुसाफिर, शैलेन्द्र तडवी समेत बड़ी संख्या में स्टैचू ऑफ यूनिटी क्षेत्र के आदिवासी राजपीपला गांधी चोक पर धरना दे रहे है. उनकी मांग है कि स्टैच्यू ऑफ यूनिटी डेवलपमेंट अथॉरिटी तुरंत अधिसूचना रद्द कर दे और विकास के नाम पर आदिवासियों से ज़मीन ज़ब्त न करे, यहाँ के स्थानीय लोगों को रोजगार में प्राथमिकता दें. सभी नेताओने प्रधानमंत्री मोदी, गुजरात के मुख्यमंत्री रूपाणी को दरकिनार कर सीधा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को समस्याओं की मध्यस्थता के लिए लिखित सिफारिश की है।


उन्होंने कहा कि जब आप अमेरिका के राष्ट्रपति के रूप में भारत आ रहे हैं, तो दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा स्टैचू ऑफ यूनिटी से आदिवासी समुदाय और पर्यावरण को जो नुकशान हो रहा हैं वह देखते जाना, उसका संज्ञान लेना और मदद करते जाना. UNO (संयुक्त राष्ट्र) का भी मानना कि अगर दुनिया को ग्लोबल वार्मिंग से बचाना है तो हर इंसान को आदिवासी जीवन शैली अपनानी होगी. भारत में जहां जहां आदिवासी है उनहों ने पर्यावरण को बचाए हुए है. यह भारत के लिए शर्म की बात है कि केंद्र और गुजरात की राज्य सरकार आज आदिवासी जीवन शैली को भूल कर अंधे विकास के पीछे भाग रही है।

दुनिया की सबसे ऊँची प्रतिमा स्टैचू ऑफ यूनिटी आज आदिवासी समुदाय और पर्यावरण के लिए खतरनाक होती जा रही है और आदिवासियों ने इस गंभीर मुद्दे को लेकर गुजरात राज्य के राज्यपाल, मुख्यमंत्री, भारत के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बार-बार पत्र लिख कर ध्यान खेंचने कि कोशिश कर चूंके हैं लेकिन भारत देश का शासन-प्रशासन आदिवासी जीवन शैली और पर्यावरण के महत्व नहीं समझ पा रहे हैं. हम आपसे विनंती करते है कि आप अमेरिकी राष्ट्रपति होने के नाते स्टैचू ऑफ यूनिटी के आसपास जो आदिवासीयों का विनाश, पर्यावरण को नुकशान और आदिवासीयों के संवैधानिक अधिकार खतम हो रहे है, झूठे विकास के नाम पर आदिवासीयों की जमीन हमारे देश की सरकार की तरफ से लूंटी जा रही है. इस समस्या पर भारत देश की सरकार और स्टेचू ऑफ यूनिटी की जनजातियों की गंभीर समस्याओं पर आप मध्यस्थी बनो एसी हमारी प्रार्थना हैं.

गुजरात में मूल निवासी बन रहे हैं शरणार्थी: जिग्नेश मेवाणी