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CAA लागू करने से इनकार नहीं कर सकता कोई राज्य: कपिल सिब्बल और सलमान खुर्शीद

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कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सलमान खुर्शीद ने भी नागरिकता कानून को कपिल सिब्बल वाली ही बात दोहराई है. उन्होंने भी कहा है कि संवैधानिक रूप से राज्यों के लिए इस कानून को न मानना मुश्किल होगा. खुर्शीद ने कहा, ”संवैधानिक रूप से, राज्य सरकार के लिए यह कहना मुश्किल होगा कि’ हम संसद द्वारा पारित कानून का पालन नहीं करेंगे ‘. यदि सुप्रीम कोर्ट हस्तक्षेप नहीं करता है तो यह क़ानून की किताब पर बना रहेगा. अगर कुछ क़ानून की किताब पर है तो आपको कानून का पालन करना पड़ेगा, अन्यथा इसके अलग नतीजे हो सकते हैं.”

खुर्शीद ने कहा कि इस कानून को लेकर अब सिर्फ सुप्रीम कोर्ट ही कुछ कर सकता है. उन्होंने कहा, ”जहां तक इस कानून की बात है यह एक ऐसा मामला है जहां राज्य सरकारों का केंद्र के साथ बेहद गंभीर मतभेद है. इसलिए हम सुप्रीम कोर्ट के अंतिम निर्णय की प्रतीक्षा करेंगे. आखिरकार सुप्रीम कोर्ट तय करेगा और तब तक जो कुछ कहा गया / किया गया / नहीं किया गया वो सब अस्थाई और अनिश्चित है.”

कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने कहा है कि कोई भी राज्य नागरिकता संशोधन कानून (CAA) को लागू करने से इनकार नहीं कर सकता. सिब्बल ने कहा, ”अगर CAA पास हो चुका है तो कोई भी राज्य ये नहीं कह सकता- ‘मैं इसे लागू नहीं करूंगा’. यह संभव नहीं है और असंवैधानिक है. आप इसका विरोध कर सकते हो, आप विधानसभा में प्रस्ताव पास कर सकते हो और केंद्र सरकार से इसे वापस लेने के लिए कह सकते हो.”

पूर्व कानून मंत्री सिब्बल ने केरल लिटरेचर फेस्टिवल के तीसरे दिन कहा, ‘’संवैधानिक रूप से, यह कहना है कि मैं इसे (CAA को) लागू नहीं करूंगा, इससे और ज्यादा मुश्किलें पैदा होंगी.’’

बता दें कि केरल, पंजाब, राजस्थान, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र जैसे राज्यों की सरकारों ने CAA के खिलाफ आवाज उठाई है. केरल और पंजाब की विधानसभाओं में CAA के खिलाफ प्रस्ताव भी पास किए गए हैं. इसके अलावा केरल सरकार ने इस हफ्ते की शुरुआत में CAA के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का भी रुख किया था.

CAA का विरोध करने वाले लगभग सभी राज्य (देशभर में) राष्ट्रीय नागरिक पंजी (NRC) और राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर-2020 (NPR) का भी विरोध करते दिख रहे हैं.

इसे लेकर सिब्बल ने कहा, ”NRC NPR पर आधारित है और NPR को लागू करने का काम स्थानीय रजिस्ट्रार का है…कहा जा रहा है कि हम एक राज्य स्तरीय अधिकारी को केंद्र का सहयोग करने की अनुमति नहीं देंगे. व्यावहारिक तौर पर यह संभव है या नहीं, ये मुझे नहीं पता. मगर संवैधानिक रूप से राज्य सरकार के लिए यह कहना काफी मुश्किल होगा कि मैं संसद में पास किए गए किसी कानून का पालन नहीं करूंगा.”